बाजार में गिरावट के बीच निफ्टी के 22,400 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही है, यदि कमजोरी आगे जारी रहती है। यह स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचली ट्रेंडलाइन तथा 200 सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से जुड़ा हुआ है। निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबार में इस स्तर के आसपास बाजार की चाल महत्वपूर्ण रहेगी।
भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों यानी FII की भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है।
भारतीय बाजार की कमजोरी के बीच एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:51 बजे S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था, जबकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी और Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इस तरह वैश्विक बाजारों में एक समान रुख नहीं रहा।
बाजार की तकनीकी स्थिति को लेकर एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन है। उनके अनुसार, यदि इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आती है तो शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। फिलहाल सेंसेक्स की 400 अंक से अधिक की गिरावट, निफ्टी का 22,700 से नीचे जाना, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख दबाव वाले कारक बने हुए हैं।
