नई दिल्ली । बच्चों की परवरिश में पढ़ाई, होमवर्क और अच्छे व्यवहार के साथ उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी स्किल सिखाना भी बेहद अहम है। कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जहां किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता और बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समझ की जरूरत पड़ती है। उम्र के अनुसार कुछ जरूरी बातें सिखाकर बच्चों को मुश्किल समय में घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।
सबसे पहले बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और जरूरत के मुताबिक घर से जुड़ी जरूरी जानकारी याद करानी चाहिए। छोटी उम्र में इसे खेल-खेल में दोहराकर सिखाया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा बिना घबराए अपनी पहचान और जरूरी जानकारी बता सके।
बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि आपात स्थिति में किससे मदद मांगनी है। परिवार के जरूरी फोन नंबर याद कराने के साथ उन्हें यह समझाना जरूरी है कि फोन पर अपनी स्थिति और परेशानी को साफ शब्दों में कैसे बताया जाए।
अनजान लोगों से सावधानी बरतना भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्किल है। उन्हें समझाएं कि हर व्यक्ति पर तुरंत भरोसा करना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कुछ देने, कहीं ले जाने या माता-पिता के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश करे, तो बच्चे को वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद मांगनी चाहिए।
अगर बच्चा भीड़ या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से अलग हो जाए, तो उसे इधर-उधर भागने के बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना चाहिए। पुलिसकर्मी या किसी जिम्मेदार कर्मचारी से मदद मांगने की आदत उसे ऐसी स्थिति में सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।
घर में आग लगने जैसी स्थिति के लिए भी बच्चों को पहले से सामान्य सुरक्षा नियम समझाना जरूरी है। उन्हें बताया जाना चाहिए कि घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना है और आग या धुएं वाली जगह पर वापस जाकर सामान लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पानी के आसपास सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। स्विमिंग पूल, तालाब या किसी जलाशय के पास अकेले नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी बड़े को बुलाने की आदत डालनी चाहिए।
उम्र के अनुसार बच्चों को बेसिक फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जा सकती है। छोटी चोट या कट लगने पर क्या करना है, यह समझाने के साथ उन्हें यह भी बताना चाहिए कि गंभीर चोट की स्थिति में खुद इलाज करने के बजाय तुरंत किसी बड़े से मदद लें।
बड़े बच्चों को धीरे-धीरे किचन सेफ्टी के नियम सिखाए जा सकते हैं। गैस, गर्म बर्तन, चाकू और बिजली के उपकरणों से जुड़ी सावधानियां उनकी उम्र और समझ के अनुसार बताना जरूरी है।
बच्चों को जरूरत पड़ने पर साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी सिखाएं। अगर कोई बात या स्थिति उन्हें असहज लगे, तो वे बिना डर अपनी बात कह सकें और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी दें।
सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा परेशानी छिपाने के बजाय समय पर मदद मांगे। गलती होने या डर लगने पर सच बताना जरूरी है। इन स्किल्स को बच्चों पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उदाहरणों, रोल-प्ले और छोटे अभ्यास के जरिए सहज तरीके से सिखाया जा सकता है।
