ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि AIMIM के स्थानीय नेता लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग बिरादरियों की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था मौजूद है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए वैसी मजबूत राजनीतिक आवाज नहीं बन पाई है। उन्होंने लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की बात कही।
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि अगले 10 से 12 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने व्यापक विपक्षी एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। इस बयान के बाद यूपी में AIMIM और सपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई है।
ओवैसी ने बिहार के चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों की मांग की थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति और संगठन के हिसाब से काम करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ओवैसी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं और पार्टी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में रहेगी और इसके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी।
मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद और पुराने कब्रिस्तान से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने और लखनऊ में परवेज नाम के व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं महिला मतदाताओं को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और पार्टी को सभी वर्गों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
गठबंधन को लेकर ओवैसी ने अभी किसी दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। ताजा बयानों में उन्होंने समान सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर काम करने की संभावना खुली रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़े फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करने का संकेत दिया है।
इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में AIMIM का गठबंधन को लेकर रुख आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।
