मोहम्मद शमी अमरोहा सदर तहसील के सहसपुर अलीनगर के रहने वाले हैं। ऐसे में जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात को उनके गृह जिले की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि शमी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अमरोहा से कर सकते हैं। इसी बीच उनके बड़े भाई मोहम्मद हसीब को भी चुनाव मैदान में उतारने की संभावना की चर्चा सामने आई है। हालांकि, इस बारे में भी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमरोहा सीट का सियासी इतिहास भी इस चर्चा को अहम बनाता है। इस विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था। वर्तमान में समाजवादी पार्टी के महबूब अली लंबे समय से यहां चुनाव जीतते आ रहे हैं। उन्होंने 2002 से लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की है। पिछले चार चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते हैं। इससे पहले 2002 में वह राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर चुनाव जीते थे और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे।
2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली ने भाजपा के राम सिंह को 71,036 वोटों के अंतर से हराया था। महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि राम सिंह को 57,699 वोट हासिल हुए थे। अमरोहा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.25 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग दो लाख बताई जाती है।
मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हैं। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद से भारतीय टीम में उनकी वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। हाल में वेस्टइंडीज दौरे के लिए घोषित टीम में भी उनका नाम नहीं था।
जयंत चौधरी के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या शमी खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे या परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे बढ़ाएंगे। फिलहाल दोनों ही संभावनाएं चर्चा का हिस्सा हैं और किसी भी विकल्प पर आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में अमरोहा से शमी या उनके भाई के चुनाव लड़ने की चर्चा को अभी राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
