सिंगरौली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रहे थे। उत्साह में उन्होंने नरेंद्र मोदी अमर रहे का नारा लगा दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद किसी ने नरेंद्र मोदी जिंदाबाद का नारा लगाया तो विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भी तुरंत जिंदाबाद के नारे लगाए और अपनी चूक पर मुस्कुराते नजर आए। कार्यक्रम में हुआ यह छोटा सा वाकया बाद में चर्चा का विषय बन गया।
दूसरी ओर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मैदान के किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से पहले 10 लाख रुपए किराया लिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उस समय कहा था कि कार्यक्रम के लिए 10 लाख क्या 10 करोड़ रुपए भी मांगे जाते तो कांग्रेस उसे जुटाकर देती। अब आईडीए की ओर से मैदान के किराए के तौर पर चार लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से की जा रही वसूली और दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने बयान का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे विवाद में मैदान का किराया राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।
गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। एक किसान ने सिंधिया से सीधे कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। किसान की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने मौके पर मौजूद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों के नाम और मोबाइल नंबर नोट करने को कहा। कलेक्टर ने जब ठीक है कहा तो सिंधिया ने दोबारा उन्हें निर्देश दिया कि सिर्फ ठीक है कहने के बजाय नाम और नंबर लिखे जाएं। उन्होंने पेन और पैड निकालकर जानकारी नोट करने को कहा। इसके बाद किसानों की जानकारी दर्ज की गई।
इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी एक अधिकारी की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी की ड्यूटी राजधानी के नजदीकी जिले में लगाई गई थी लेकिन वे अभियान से जुड़े काम के बजाय मंत्रालय में बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
इस तरह एक ही दिन में सिंगरौली से इंदौर और गुना तक सामने आए अलग-अलग घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कहीं नारेबाजी में हुई चूक सुर्खियां बनी तो कहीं कार्यक्रम के खर्च और किसानों की खाद समस्या ने राजनीतिक बहस को हवा दी।
