प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि कई लोगों ने उनसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं होगा, लेकिन अब संसद ने इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि उनकी नेशनल पार्टी ने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और सरकार ने उस लक्ष्य को पूरा किया है।
लक्सन के मुताबिक समझौते से न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां और आय के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक पहुंच बनने से न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह समझौता न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने समझौते से जुड़े शुल्क प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि एफटीए लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। समझौते के पूरी तरह लागू होने पर 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त कर दिया जाएगा या उसे काफी कम कर दिया जाएगा।
मैक्ले ने कहा कि समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में भी सुविधा बढ़ेगी। इसके तहत सीमा पर क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक न्यूजीलैंड के कारोबारियों की बेहतर पहुंच को भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि भारत में भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में अपने कारोबारी संबंधों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापार समझौते की बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी। न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि संसद की मंजूरी के बाद एफटीए इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा। हालांकि इसके लिए समझौते में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।
मैक्ले ने कहा कि एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लक्ष्य को भी समर्थन देगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। नए समझौते को इसी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
संसद की मंजूरी के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। समझौते के लागू होने के बाद शुल्क में बदलाव और बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों का असर दोनों देशों के निर्यातकों और कारोबारियों पर पड़ने की उम्मीद है।
