जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।
पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।
पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।
बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।
