दरअसल दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी कई राजनीतिक मुलाकातों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हो या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी मौजूदगी या फिर भोपाल में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ मेल-मुलाकात इन तस्वीरों को उनके समर्थक अलग संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अब दतिया में समर्थकों का जुटना और उनका उत्साह यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि दादा की राजनीतिक पकड़ अभी भी कमजोर नहीं हुई है।
उधर छतरपुर से सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। देरी रोड पर उर्मिल नदी उफान पर है और तेज बहाव के कारण पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। इसके बावजूद लोगों को नदी पार करने की मजबूरी बनी हुई है। इसी मजबूरी के बीच कुछ लोगों के लिए यह स्थिति कमाई का जरिया बन गई है। दावा है कि राहगीरों से 50-50 रुपए लेकर उन्हें उफनती नदी पार कराई जा रही है। जान जोखिम में डालकर लोग तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति में प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नजर नहीं आए। लोगों की मजबूरी और खतरे के बीच चल रहा यह कथित कारोबार व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।
वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को लेकर है। कांग्रेस से निष्कासित चल रहे लक्ष्मण सिंह इन दिनों राजनीति से इतर संगीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने खुद वीडियो जारी कर बताया कि वे गाना सीख रहे हैं और इस दौरान भजन भी सुनाए। राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद कांग्रेस से निष्कासन और उसके बाद नई पार्टी बनाने के संकेतों के बीच उनकी राजनीतिक राह को लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन फिलहाल उनके सुर राजनीति से ज्यादा संगीत में साधे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छोटे राजा साहब के सुर आगे किस दिशा में जाते हैं।
इसी बीच राजधानी भोपाल और आसपास के राजनीतिक गलियारों में एक नेता जी की कथित पिटाई की चर्चा भी गर्म है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि नेता जी के साथ दो अलग-अलग मौकों पर मारपीट हुई। दावा किया जा रहा है कि पहली घटना एक बिल्डिंग में हुई जबकि दूसरी बार उन्हें रास्ते में रोककर पीटा गया। यहां तक चर्चा है कि इस कथित मारपीट में उनके कुछ दांत भी टूट गए। हालांकि नेता जी और उनके करीबियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है और मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके सियासी और स्थानीय गलियारों में यह मामला फिलहाल खूब चर्चा में है।
कुल मिलाकर दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की भीड़ से लेकर छतरपुर की उफनती नदी और भोपाल के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं तक मध्य प्रदेश में इन दिनों घटनाएं अलग-अलग रंग दिखा रही हैं। कहीं शक्ति प्रदर्शन के मायने निकाले जा रहे हैं तो कहीं व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं राजनीति से दूर संगीत के सुर सुनाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन तस्वीरों और चर्चाओं का असर आने वाले दिनों में किस रूप में दिखाई देता है यह देखना दिलचस्प होगा।
