रचना नगर में जूंबा डांस हाउस पर सीलिंग की कार्रवाई की गई और भवन पर निगम के आदेश से जुड़ी तख्ती लगाई गई। इसी तरह सर्वधर्म बी सेक्टर स्थित क्लियर होटल को भी बंद कराया गया। गौतम नगर में आवासीय भवन में संचालित एक होटल के संचालक ने खुद ही कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। खानूगांव में भी एक भवन के भीतर चल रही व्यावसायिक गतिविधि को बंद कराया गया। वहीं ई 3 अरेरा कॉलोनी में निगम की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई शुरू की। यहां दुकानदारों ने अधिकारियों से कुछ समय की मोहलत मांगी लेकिन निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहले ही कई दिनों की मोहलत दी जा चुकी है।
नगर निगम की इस कार्रवाई के पीछे आवासीय भवनों में व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर चल रहा मामला अहम है। निगम ने 26 अगस्त तक कुल 8264 नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों के बाद संबंधित मामलों का परीक्षण किया गया। इसके बाद कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ। इससे पहले वार्ड 58 के गौतम नगर स्थित एक रेसिडेंशियल बिल्डिंग में संचालित होटल को भी सील किया जा चुका है। रविवार को कई जगहों पर 24 घंटे के नोटिस दिए गए थे और सोमवार से सीलिंग तथा व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम भी किए हैं। मिसरोद हबीबगंज रातीबड़ कोहेफिजा गोविंदपुरा ऐशबाग और कोलार थाना क्षेत्रों से पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अलग अलग इलाकों में नोटिस जारी करने के बाद उनके मामलों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई भी महत्वपूर्ण है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत आदेशों को भी निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इसी दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है।
दूसरी ओर रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों की ओर से भी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में कारोबार होने से शोर भीड़ और ट्रैफिक जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इससे सार्वजनिक शांति और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। असामाजिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई को आने वाले दिनों में और तेज किए जाने की संभावना है।
