व्यापक बाजार की बात करें तो यहां भी कारोबारी धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.10 प्रतिशत जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.13 प्रतिशत की गिरावट रही। हालांकि बड़ी कंपनियों के मुकाबले व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का एक वर्ग अभी भी घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के अवसर तलाश रहा है।
सेक्टरवार कारोबार में सीमेंट कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी सीमेंट इंडेक्स 1.33 प्रतिशत टूट गया। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 प्रतिशत निफ्टी मेटल में 0.86 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा हेल्थकेयर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की गिरावट के बीच कुछ सहारा दिया।
निफ्टी 50 के शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज कोटक महिंद्रा बैंक अदाणी पोर्ट्स सिप्ला और बीईएल प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत हिंडाल्को एचडीएफसी बैंक महिंद्रा एंड महिंद्रा श्रीराम फाइनेंस ग्रासिम इंडस्ट्रीज एचसीएल टेक भारती एयरटेल और रिलायंस जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और बढ़ाया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सपायरी से जुड़ी उठापटक और मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता का अभाव फिलहाल बाजार को एक सीमित दायरे में रख रहा है। हालांकि कंपनियों की कमाई के अनुमानों में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर को काफी हद तक शामिल किया जा चुका है। हाल में कच्चे तेल की कीमतों और लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में आई नरमी से महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। अगर ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आती है तो इसका असर कंपनियों की लागत और भविष्य की कमाई पर सकारात्मक पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का निवेश और कंपनियों की कमाई में बनी मजबूती भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। खासकर मिडकैप कंपनियों के कई सेक्टर वैश्विक अनिश्चितताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और घरेलू मांग का फायदा उठा रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल सम्मेलन में होने वाले भाषण पर भी रहेगी। निवेशक उनके भाषण से महंगाई ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर संकेत तलाशेंगे। इन संकेतों का असर वैश्विक जोखिम धारणा और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम भी दलाल स्ट्रीट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
