प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले ए. बालकृष्णन के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार उनके कार्यकर्ताओं और बालकृष्णन से जुड़े सभी प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
ए. बालकृष्णन का जीवन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। विवेकानंद केंद्र से जुड़े उनके कार्यकाल में शिक्षा सामाजिक गतिविधियों और संगठन निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। पूर्वोत्तर भारत में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि उनके निधन पर देश के अलग अलग हिस्सों से नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा और खासकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को वहां के लोग और पूरा देश लंबे समय तक याद रखेगा। रिजिजू ने उन्हें सच्चा कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा भावना का प्रतीक था। उन्होंने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बालकृष्णन के निधन को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन का ध्येय बनाकर बालकृष्णन ने पांच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य समाज जागरण शिक्षा और संगठन निर्माण के लिए खुद को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन के योगदान को राष्ट्रसेवा की प्रेरक परंपरा बताया और उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी ए. बालकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सच्चा कर्मयोगी और जीवनव्रती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कन्याकुमारी से लेकर असम और पूर्वोत्तर भारत तक विवेकानंद केंद्र के काम को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी। ए. बालकृष्णन का निधन समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसी कमी छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनके जीवन और कार्यों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित सेवा की लंबी यात्रा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
