नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान शिवरामपुर के प्राचार्य बीके शर्मा ने गुरुवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय चकौंध का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में पठन-पाठन की स्थिति संतोषजनक पाई गई। शिक्षकों और छात्राओं की उपस्थिति भी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ठीक मिली। प्राचार्य ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जायजा लिया और व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत वाले बिंदुओं को चिन्हित किया।
निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की गई। भोजन को निर्धारित मीनू के अनुरूप तैयार किया जाना पाया गया और स्वच्छता तथा गुणवत्ता के स्तर पर व्यवस्था संतोषजनक मिली। छात्राओं को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी बड़ी कमी का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बावजूद विद्यालय में कुछ ऐसी व्यवस्थागत कमियां सामने आईं, जिन्हें तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए।
प्राचार्य ने पाया कि विद्यालय में निपुण तालिका और शिक्षक डायरी उपलब्ध नहीं थी। शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी और शिक्षण कार्य को व्यवस्थित रखने के लिहाज से इन अभिलेखों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दस्तावेजों की अनुपलब्धता पर प्राचार्य ने नाराजगी जताई और विद्यालय प्रशासन को आवश्यक रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रखने तथा शैक्षणिक व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन की सुरक्षा और जल व्यवस्था से जुड़ी समस्या भी सामने आई। विद्यालय के तृतीय तल पर स्थित पानी की टंकी तक पहुंचने के लिए सीढ़ी की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा परिसर और आसपास बंदरों का प्रकोप होने की बात सामने आई, जिसके कारण पानी की टंकी का पाइप टूट गया है। पाइप क्षतिग्रस्त होने से जल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इससे छात्राओं को दैनिक जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्राचार्य ने विद्यालय प्रशासन को संबंधित समस्याओं को जल्द दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान डीएलएड कक्षाओं में प्रशिक्षुओं की घटती उपस्थिति का मुद्दा भी सामने आया। प्राचार्य बीके शर्मा ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण में नियमित उपस्थिति शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशिक्षुओं के भविष्य के लिए आवश्यक है। शासन और परीक्षा नियामक प्राधिकारी के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण कक्षाओं में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है।
प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले प्रशिक्षुओं के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। जिन प्रशिक्षुओं की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें आगामी सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं के परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित किया जा सकता है। ऐसे प्रशिक्षुओं को शासन स्तर से मिलने वाली छात्रवृत्ति का लाभ भी नहीं मिल पाने की बात कही गई है।
डायट प्राचार्य ने प्रशिक्षुओं को नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने और प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी। निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों को दूर करने के निर्देश के साथ विद्यालय प्रशासन को शैक्षणिक रिकॉर्ड, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों का उद्देश्य विद्यालय में छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
