नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कृष्णानगर की तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने सर्किट हाउस विवाद से जुड़े एक मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई अदालत की ओर से जारी किए गए समन के बावजूद सुनवाई के दौरान उनकी उपस्थिति नहीं होने के बाद की गई है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस के अनुसार, मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 227 के तहत दायर शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायत में महुआ मोइत्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इनमें महिला की मर्यादा के अपमान, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले जानबूझकर किए गए कृत्य, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने वाले बयान से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा को कई बार समन जारी किए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत अदालत में उपस्थित होने का अवसर दिए जाने के बावजूद उनकी पेशी नहीं हुई। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। पुलिस ने भी अदालत के इस आदेश की पुष्टि की है।
यह पूरा विवाद 14 अगस्त की रात कृष्णानगर सर्किट हाउस में हुई घटना से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह शाम करीब 6 बजकर 15 मिनट पर सर्किट हाउस पहुंची थीं और उन्हें नियमित रूप से एक कमरा आवंटित किया गया था। बाद में रात करीब 10 बजे उन्हें परिसर खाली करने के लिए कहा गया।
महुआ मोइत्रा ने दावा किया था कि रात करीब 9 बजकर 47 मिनट पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की ओर से उन्हें फोन किया गया और सर्किट हाउस खाली करने को कहा गया। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर की ओर से उन्हें व्हाट्सऐप संदेश के जरिए 12 अगस्त का एक आदेश भेजा गया था। इस आदेश में रखरखाव और सफाई कार्य का हवाला देते हुए परिसर खाली कराने की बात कही गई थी।
घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने नादिया जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और संसदीय प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया। इस मामले को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार नोटिस भी दिया था।
अब अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने से विवाद ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। हालांकि वारंट जारी होना अपने आप में आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
फिलहाल अदालत की कार्रवाई के बाद महुआ मोइत्रा की कानूनी स्थिति पर ध्यान केंद्रित हो गया है। आगे की कार्यवाही में उनकी अदालत के समक्ष पेशी और मामले से जुड़े आरोपों पर होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। सर्किट हाउस में हुए विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच चुका है।
