भोपाल । गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। इस कांड में मौतों का आंकड़ा नौ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है और गुजरात पुलिस की जांच में मध्य प्रदेश से जुड़े आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। गुजरात स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से रईस को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक रईस पर जहरीली शराब तैयार करने वाले नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उसे गुजरात ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र सिंह यादव उर्फ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक रईस को नरेंद्र के कथित अनुभव की जानकारी थी और इसी वजह से उसे गुजरात बुलाया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार भावनगर में रईस और नरेंद्र ने स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर नकली शराब तैयार की। एफआईआर में आरोप है कि पहले एक खेप तैयार की गई थी लेकिन बाद की खेप में मेथनॉल मिलाकर करीब 25 कार्टन जहरीली शराब तैयार की गई। इसे अलग अलग लोगों तक पहुंचाया गया।
इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शराब को तैयार करने में नरेंद्र की भूमिका बताई जा रही है वही शराब पीने के बाद उसकी भी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नरेंद्र को भावनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 18 अगस्त को उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में उसे मामले के आरोपियों में शामिल किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
फोरेंसिक जांच में जहरीली शराब की गंभीरता भी सामने आई है। जब्त किए गए एक नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल पाया गया जबकि इथेनॉल की मात्रा सिर्फ 0.94 प्रतिशत थी। मेथनॉल अत्यंत जहरीला पदार्थ है और लाइसेंसी शराब में इसका इस तरह मौजूद होना सामान्य नहीं है। इसी जहरीले मिश्रण को पीने के बाद कई लोगों की हालत बिगड़ी और मौतें हुईं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मेथनॉल कहां से खरीदा गया और तैयार की गई शराब की कितनी बोतलें अभी भी लोगों तक पहुंची हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रईस और उसके साथियों ने शराब बनाने के लिए कच्चा माल जुटाया था। एफआईआर के मुताबिक इसमें मेथनॉल के साथ बोतलें कैप और ब्रांडेड शराब जैसे दिखने वाले स्टीकर शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि नकली शराब को असली ब्रांड की बोतलों जैसा रूप देकर बाजार में पहुंचाने की कोशिश की गई। गुजरात पुलिस ने अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में नकली शराब रसायन तथा अन्य सामान जब्त किए हैं।
इस मामले का मध्य प्रदेश से जुड़ना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मुरैना में जनवरी 2021 में जहरीली शराब कांड में 24 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई की गई थी। पांच साल बाद भावनगर कांड में मुरैना के एक व्यक्ति का नाम सामने आने से अवैध शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। 2021 के मुरैना मामले में बाद में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी।
अब गुजरात पुलिस की जांच का फोकस केवल भावनगर तक सीमित नहीं है। रईस के मध्य प्रदेश संपर्कों से लेकर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए कच्चे माल की सप्लाई और तैयार शराब के वितरण तक हर कड़ी की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। भावनगर की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि अवैध और मिलावटी शराब किस तरह लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।
