कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली और 40 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बने। वह 1984 से 1989 तक इस पद पर रहे।
राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में तकनीक, संचार, शिक्षा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए भी याद किया जाता है। उनके समर्थक उन्हें युवा भारत की बदलती जरूरतों और तकनीकी विकास के साथ देश को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल करते हैं। उनके राजनीतिक विचारों में युवाओं की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहा।
कांग्रेस नेताओं ने जयंती के अवसर पर राजीव गांधी की उस विरासत को भी रेखांकित किया, जिसमें युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और देश में आधुनिक तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का संवैधानिक बदलाव भी उनके प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वपूर्ण पहलों में गिना जाता है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।
राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कई विवादों और चुनौतियों से भी जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।
राजीव गांधी की जयंती पर होने वाले कार्यक्रम हर वर्ष उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक विरासत को याद करने का अवसर बनते हैं। वीर भूमि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, तकनीकी प्रगति और युवाओं की भूमिका से जुड़े उनके विचारों को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का एक साथ पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देना उनके राष्ट्रीय राजनीतिक जीवन की व्यापक पहचान को भी दर्शाता है।
