नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही बेहतर एआई मॉडल तैयार करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। इसी जरूरत के बीच किताबों को खरीदकर उन्हें डिजिटल डेटा में बदलने और इसके लिए भौतिक रूप से नष्ट करने की प्रक्रिया चर्चा में आई है। इस तरीके ने तकनीकी दुनिया के साथ किताबों के संरक्षण और उनके भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं।
इस मामले में Anthropic का Project Panama विशेष चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के तहत बड़ी संख्या में किताबों को खरीदकर उन्हें स्कैन करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसका उद्देश्य किताबों में मौजूद सामग्री को डिजिटल स्वरूप में बदलना और उसे एआई मॉडल के प्रशिक्षण के लिए उपयोगी डेटा में परिवर्तित करना बताया गया है।
सामान्य तौर पर किसी किताब को डिजिटल बनाने के लिए हर पन्ने को सावधानी से पलटकर स्कैन किया जाता है। यह प्रक्रिया छोटी संख्या में किताबों के लिए संभव है, लेकिन जब लाखों पन्नों को डिजिटल रूप में बदलने की बात आती है, तो इसमें काफी समय और संसाधन लग सकते हैं। इसी चुनौती को कम करने के लिए किताबों को काटकर स्कैन करने का तरीका सामने आया है।
इस प्रक्रिया में किताब की रीढ़ यानी स्पाइन को काटकर उसके पन्नों को अलग किया जाता है। इसके बाद अलग हुए पन्नों को तेज गति से काम करने वाली स्कैनिंग मशीनों में डाला जा सकता है। मशीन एक के बाद एक पन्नों को डिजिटल फाइल में बदल देती है। इस तरह पूरी किताब का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो जाता है, लेकिन मूल किताब फिर सामान्य रूप से उपयोग करने योग्य नहीं रहती।
किताबों को इस तरह स्कैन करने का सबसे बड़ा कारण समय और लागत को कम करना माना जा रहा है। यदि प्रत्येक पन्ने को किताब से जुड़े रूप में ही स्कैन किया जाए तो मशीन के साथ हर किताब को संभालने में अतिरिक्त समय लग सकता है। पन्नों को पहले ही अलग कर देने से उन्हें स्वचालित स्कैनिंग प्रणाली में लगातार डाला जा सकता है और बड़े संग्रह को अपेक्षाकृत कम समय में डिजिटल बनाया जा सकता है।
एआई मॉडल की ट्रेनिंग में बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले टेक्स्ट डेटा की आवश्यकता होती है। किताबों में लंबे समय से संकलित साहित्य, ज्ञान, विचार और मानव लेखन मौजूद है। ऐसे डेटा को डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराने से एआई मॉडल को विभिन्न विषयों और लेखन शैलियों से संबंधित सामग्री मिल सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि किताबों को काटकर स्कैन करने की ऐसी प्रक्रिया केवल Anthropic तक सीमित है या दूसरी एआई कंपनियां भी इसी तरह के तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। बाजार में पुरानी और कम बिकने वाली किताबों की बड़ी खरीद को लेकर चर्चाएं जरूर हुई हैं, लेकिन हर ऐसी खरीद को एआई कंपनियों से जोड़ना उचित नहीं होगा।
इस प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा सवाल किताबों के संरक्षण से जुड़ा है। कई किताबें केवल जानकारी का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखती हैं। यदि ऐसी पुस्तकों को केवल डिजिटल डेटा हासिल करने के उद्देश्य से नष्ट किया जाता है, तो भविष्य में मूल प्रतियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, एआई कंपनियों के लिए तेज और बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में किताबों की स्कैनिंग का यह तरीका तकनीक और संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर नई बहस खड़ी करता है। आने वाले समय में यह सवाल और महत्वपूर्ण होगा कि एआई ट्रेनिंग के लिए जरूरी डेटा जुटाते समय पुस्तकों की मूल प्रतियों, लेखकों के अधिकार और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
