खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं की है। उनके मुताबिक पार्टी लंबे समय से चली आ रही परंपरा का ही पालन कर रही है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या किसी विशेष तरीके से राष्ट्रगीत गाने को अपराध माना जा सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वंदे मातरम गाना अपराध है तो फिर उन ऐतिहासिक नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इसी रूप में इसे गाया था। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए अपने तर्क को सामने रखा।
खरगे ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय गीतों और उनसे जुड़ी परंपराएं उसके राजनीतिक अस्तित्व से काफी पहले की हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने करीब नौ दशक से चली आ रही परंपरा को ही आगे बढ़ाया है। उनके बयान में यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि वंदे मातरम को लेकर वर्तमान विवाद को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। खरगे ने कहा कि यदि किसी एक सरकार के निर्णय को ही राष्ट्रीय नियम मान लिया जाए तो भविष्य में सत्ता बदलने पर अलग नियम बनाए जा सकते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़ी परंपराओं को राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर बदलने के बजाय व्यापक सहमति के साथ देखा जाना चाहिए।
वंदे मातरम को लेकर मौजूदा विवाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से जुड़ा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम का गायन बीच में रोक दिया गया था। आरोप के अनुसार सोनिया गांधी ने इशारे के माध्यम से गीत को रोकने के लिए कहा था। इसके बाद इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कांग्रेस की ओर से इस विवाद के बीच अपने रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। खरगे का बयान इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने वंदे मातरम के गायन को ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी ने किसी नई व्यवस्था का पालन नहीं किया।
वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत रहा है और इसे देश के राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रगान जन गण मन से अलग इसकी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका है। इसी वजह से इससे जुड़ी किसी भी राजनीतिक टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
मौजूदा विवाद में एक तरफ बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस इसे पुरानी परंपरा और राजनीतिक विवाद का विषय बता रही है। खरगे के बयान के बाद यह बहस और व्यापक हो गई है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।
