USB-C की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और रिवर्सिबल डिजाइन है। इसे किसी भी दिशा से डिवाइस में लगाया जा सकता है। USB-IF के अनुसार Type-C कनेक्टर को मोबाइल डिवाइस से लेकर लैपटॉप और टैबलेट तक के लिए डिजाइन किया गया है। यह अलग-अलग स्तर की पावर और परफॉर्मेंस को सपोर्ट कर सकता है। लेकिन पोर्ट का आकार देखकर उसकी वास्तविक डेटा स्पीड का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
दूसरी तरफ USB4 डेटा ट्रांसफर और कनेक्टिविटी की क्षमता से जुड़ा स्टैंडर्ड है। इसका उद्देश्य ज्यादा बैंडविड्थ उपलब्ध कराना और डेटा तथा डिस्प्ले जैसे कई प्रोटोकॉल को एक ही हाई-स्पीड लिंक पर बेहतर तरीके से चलाना है। USB4 की शुरुआती क्षमताओं में 20Gbps और 40Gbps स्तर शामिल रहे हैं जबकि USB4 Version 2.0 ने 80Gbps तक की क्षमता को सक्षम किया है। कुछ विशेष डिस्प्ले उपयोग में एक दिशा में 120Gbps तक का ऑपरेशन भी संभव है लेकिन यह सामान्य USB4 स्पीड नहीं है और इसके लिए संबंधित हार्डवेयर तथा केबल की जरूरत होती है।
यही वजह है कि हर USB-C पोर्ट तेज USB4 कनेक्शन नहीं देता। USB-IF की गाइडलाइन के मुताबिक USB-C आधारित प्रोडक्ट अलग-अलग डेटा परफॉर्मेंस जैसे 5Gbps 10Gbps 20Gbps 40Gbps और 80Gbps को सपोर्ट कर सकते हैं। यहां तक कि USB 2.0 Type-C केबल भी मौजूद हैं जिनकी डेटा क्षमता काफी कम होती है और वे USB4 सिग्नल को सपोर्ट नहीं कर सकते। अगर तेज USB4 डिवाइस को धीमे USB 2.0 Type-C प्रोडक्ट या केबल के साथ इस्तेमाल किया जाए तो कनेक्शन धीमी स्पीड पर काम करेगा।
इसलिए नया स्मार्टफोन लैपटॉप SSD मॉनिटर या USB-C केबल खरीदते समय केवल USB-C लिखा देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। डिवाइस की स्पेसिफिकेशन में USB4 या संबंधित USB डेटा स्पीड की जानकारी जरूर देखें। इसी तरह केबल पर दिए गए प्रमाणित लोगो और स्पीड रेटिंग को भी देखना उपयोगी हो सकता है। USB-IF खुद उपभोक्ताओं को परफॉर्मेंस क्षमता की स्पष्ट जानकारी देखने और प्रमाणित USB प्रोडक्ट चुनने की सलाह देता है।
सीधे शब्दों में समझें तो USB-C यह बताता है कि कनेक्टर कैसा है जबकि USB4 यह बताता है कि उस कनेक्शन के जरिए डेटा और अन्य प्रोटोकॉल किस तरह और कितनी क्षमता के साथ चल सकते हैं। इसलिए USB4 और USB-C की तुलना स्पीड के आधार पर करना पूरी तरह सही नहीं है। USB-C पोर्ट हो सकता है लेकिन उसके पीछे USB 2.0 या USB 3.2 जैसी अलग तकनीक हो सकती है। वहीं USB4 का इस्तेमाल USB-C कनेक्टर के जरिए किया जाता है। यही अंतर समझना तेज डेटा ट्रांसफर और सही केबल चुनने के लिए सबसे जरूरी है।
