विभाग के अनुसार नगरीय निकायों की अलग अलग शाखाओं में कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं। जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर संपत्ति कर जलकर राजस्व प्रधानमंत्री आवास योजना और दूसरी नागरिक सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन काम इनके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों की कंप्यूटर दक्षता के साथ सरकारी डेटा की सुरक्षा और साइबर खतरों की समझ भी जरूरी मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में CPCT पहले से ही कई कंप्यूटर आधारित सरकारी पदों के लिए महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षा रही है। सरकारी विभागों में कंप्यूटर दक्षता से जुड़े पदों पर CPCT की अनिवार्यता के उदाहरण पहले भी सामने आते रहे हैं।
नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त CPCT परीक्षा पास करने से जुड़ी है। यानी संबंधित ऑपरेटर के पास निर्धारित कंप्यूटर दक्षता का प्रमाण होना जरूरी होगा। दूसरी शर्त भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी यानी iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने की है। तीसरी शर्त इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने की है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता और कार्य दक्षता बढ़ाना है।
आदेश के साथ प्रशिक्षण के लिए जरूरी पाठ्यक्रमों की सूची भी बताई गई है। इनमें बेसिक कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल जैसे सॉफ्टवेयर से जुड़े प्रशिक्षण शामिल हैं। डेटा एंट्री और सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने वाले काम में इनकी उपयोगिता बताई गई है। इसके साथ साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी जैसे पाठ्यक्रमों के जरिए सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और पासवर्ड सहित महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने की जानकारी दी जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित निर्णय लेने से जुड़े प्रशिक्षण भी ऑपरेटरों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।
सरकार की इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पड़ सकता है जिन्होंने अभी तक निर्धारित तकनीकी योग्यता या प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। आदेश के मुताबिक 30 दिनों की समय सीमा में जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने पर संबंधित ऑपरेटर को आगे नियोजन में रखने या हटाने और नियमानुसार मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यानी यह सिर्फ प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश नहीं है बल्कि इसके साथ सेवा और भुगतान पर भी असर जुड़ा हुआ है।
नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या एक समान नहीं होती। बड़े नगर निगमों में कई जोनल कार्यालय और अलग अलग शाखाएं होने के कारण ऑपरेटरों की जरूरत ज्यादा होती है। वहीं नगरपालिकाओं में राजस्व स्थापना लेखा और नागरिक सेवाओं से जुड़े काउंटरों पर ऑपरेटर काम करते हैं। नगर परिषदों में अपेक्षाकृत कम संख्या में कर्मचारी डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज को संभालते हैं।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सरकारी डेटा को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना भी बताया जा रहा है। नगरीय निकायों में नागरिकों से जुड़ी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और प्रशासनिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। ऐसे में कंप्यूटर सिस्टम चलाने वाले कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी होना जरूरी है। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकारी संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार अनजान लिंक ओटीपी और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।
इस आदेश के बाद अब नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने 30 दिन में अपनी तकनीकी योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करने की चुनौती है। विभाग की मंशा साफ है कि डिजिटल शासन व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित न रहे बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा डेटा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की भी पर्याप्त समझ हो। आने वाले दिनों में नगरीय निकायों में इन निर्देशों के पालन और ऑपरेटरों की योग्यता की स्थिति पर निगरानी बढ़ने की संभावना है।
