मंडल का यह निर्णय ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके सामने माता-पिता के निधन के बाद पढ़ाई जारी रखना पहले ही बड़ी चुनौती होती है। कई मामलों में बच्चों की जिम्मेदारी रिश्तेदारों पर आ जाती है जबकि कुछ विद्यार्थी सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थाओं के संरक्षण में शिक्षा पूरी करते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल और बोर्ड की फीस भी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है। अब परीक्षा और नामांकन शुल्क से राहत मिलने के बाद इन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा।
फीस छूट का लाभ लेने के लिए मंडल ने दस्तावेजों की प्रक्रिया भी निर्धारित की है। परीक्षा फॉर्म भरते समय पात्र विद्यार्थी को माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। यानी केवल एक अभिभावक की मृत्यु होने की स्थिति में यह विशेष छूट लागू नहीं होगी। मंडल की ओर से तय पात्रता के अनुसार दोनों माता-पिता के निधन का प्रमाण देना जरूरी होगा।
यदि कोई विद्यार्थी किसी शासन द्वारा संचालित या शासन से मान्यता प्राप्त संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहा है तो उसे संस्था की ओर से जारी प्रमाण-पत्र भी देना होगा। इस प्रमाण-पत्र में विद्यार्थी की स्थिति और संबंधित संस्था में उसके आश्रय में रहने की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यार्थी को शुल्क छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए स्कूलों और संबंधित संस्थाओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से पहले आवश्यक कागजी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएं।
मंडल का यह फैसला केवल परीक्षा शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी बच्चे की शिक्षा प्रभावित होने से रोकना भी है। माता-पिता दोनों को खो चुके विद्यार्थी कई बार बेहद सीमित संसाधनों में पढ़ाई जारी रखते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा में शामिल होने का शुल्क उनके लिए छोटी रकम नहीं होती। फीस माफ होने से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ मानसिक राहत भी मिल सकती है।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी और पात्र विद्यार्थी मंडल की संबंधित परीक्षाओं में शुल्क छूट का लाभ ले सकेंगे। इस पहल को शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इस फैसले से उन बच्चों को यह भरोसा मिलेगा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी शिक्षा और परीक्षा का रास्ता आर्थिक परेशानी के कारण नहीं रुकेगा। हालांकि पात्र विद्यार्थियों को समय रहते मृत्यु प्रमाण-पत्र और संस्था से संबंधित जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे ताकि परीक्षा फॉर्म भरते समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
