दूसरी तस्वीर महेश्वर से सामने आई जहां तिरंगा यात्रा के दौरान भाजपा विधायक राजकुमार मेव और टीआई समेत कई नेता तथा अधिकारी नाव में सवार दिखाई दिए। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना गया क्योंकि इस दौरान नर्मदा नदी उफान पर थी और बारिश के मौसम में नदी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी तेज रहता है। इसके बावजूद नाव में बैठे लोगों ने कथित तौर पर लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। इस दृश्य के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए। आम लोगों को नदी और जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से ही सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी का आरोप लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि पूरे घटनाक्रम में संबंधित प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश थे यह अलग जांच का विषय हो सकता है।
इधर मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित उज्जैन दौरे को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। राहुल गांधी सितंबर में मध्य प्रदेश के उज्जैन आने वाले हैं ऐसी चर्चा के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें पहले झारखंड के रांची जाने की सलाह दी है। सारंग ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वे वहां क्यों नहीं पहुंचे। इसी बयान के दौरान मंत्री ने राहुल गांधी को रांची जाने का ऑफर दिया और यहां तक कहा कि वे उनकी दिल्ली से रांची की टिकट भी करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में मंत्री का टिकट वाला बयान फिलहाल राजनीतिक तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस भी परेशानी का कारण बनी। स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में ड्यूटी पूरी करने के बाद आउट-पंच लगाने के लिए परेशान होते रहे। ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण शिक्षक समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। शिक्षकों की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर आउट-पंच नहीं हुआ तो उनकी उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और वेतन कटौती का खतरा पैदा हो सकता है। नियमों के अनुसार शिक्षकों को स्कूल के निर्धारित दायरे में रहकर ही ई-अटेंडेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
देर शाम तकनीकी समस्या दूर होने के बाद विभाग की ओर से शिक्षकों को राहत दी गई और उन्हें जहां वे मौजूद थे वहीं से अटेंडेंस लगाने की अनुमति दी गई। हालांकि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत कोई नई समस्या नहीं है। प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की परेशानी के कारण भी शिक्षकों को बार बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल केवल तकनीकी व्यवस्था का नहीं बल्कि ऐसी प्रणाली तैयार करने का है जो कर्मचारियों के लिए सुविधा बने परेशानी नहीं।
कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश में सामने आए इन घटनाक्रमों ने राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्था से जुड़े कई सवालों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं नदी में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंता है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी और ई-अटेंडेंस की तकनीकी समस्या ने भी अलग बहस छेड़ दी है।
