इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अगस्त की शुरुआत से अब तक बारिश का जोर बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शहर में कई दिनों से कभी बूंदाबांदी तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला जारी है लेकिन किसी दिन भी बारिश ने लंबा और तेज दौर नहीं बनाया। ऐसे में मौसम के जानकारों की नजर अब मानसून के बचे करीब डेढ़ महीने पर है। अगर आने वाले दिनों में सक्रिय सिस्टम बनते रहे तो इंदौर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर जाने की संभावना बन सकती है।
मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 12 अगस्त को उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के पास निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद यह सिस्टम और सक्रिय हुआ। इसके प्रभाव से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना बनी है।
इस मौसम सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा दिखाई दे सकता है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इंदौर में इसका असर बादल छाने और बारिश के दौर के रूप में देखने को मिल सकता है। मौजूदा पूर्वानुमान में इंदौर में 14 अगस्त से आगे भी बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।
अगस्त का महीना इंदौर के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर में इस महीने औसतन करीब 10 से 11 इंच बारिश होती है और कई दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिलता है। इतिहास में अगस्त के दौरान इससे कहीं ज्यादा बारिश भी दर्ज हो चुकी है। वर्ष 1944 में अगस्त महीने में करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड बताया जाता है। वहीं 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे के दौरान करीब साढ़े 10 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
इस लिहाज से अगस्त के बाकी दिनों में बनने वाले मौसम सिस्टम इंदौर के लिए काफी अहम रहेंगे। यदि बंगाल की खाड़ी से लगातार सिस्टम बनते रहे और मानसून ट्रफ सक्रिय रही तो शहर में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इससे न केवल मौजूदा बारिश के आंकड़े में सुधार होगा बल्कि पूरे सीजन की कुल बारिश भी औसत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है।
फिलहाल शुक्रवार सुबह घने बादलों और बूंदाबांदी ने शहरवासियों को एक बार फिर तेज बारिश की उम्मीद दी है। हालांकि किसी एक दिन के मौसम को देखकर पूरे सीजन की स्थिति तय नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और उसकी सक्रियता यह तय करेगी कि इंदौर में बारिश कितनी तेज और कितने लंबे दौर तक होती है। फिलहाल मौसम का बदला मिजाज मानसून के लिए राहत भरे संकेत जरूर दे रहा है।
