झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में राजस्थान के भीलवाड़ा की प्रसिद्ध पिचवाई चित्रकारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुप्रसिद्ध कलाकार दिनेश सोनी को डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वीरभूमि झांसी में इस प्रतिष्ठित उपाधि को प्राप्त करना उनके लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है।

दिनेश सोनी ने कहा कि भारतीय पारंपरिक एवं सांस्कृतिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किए जा रहे संबंधित पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को वे निःशुल्क शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास करेंगे, ताकि पारंपरिक चित्रकला और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा कि देश की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की पहल से कलाकारों को नई पहचान और अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री की पहल के प्रति आभार व्यक्त किया।
दिनेश सोनी ने कहा कि राज्यपाल महोदया हस्तशिल्प और पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में लगभग 18 से 20 हजार कारीगर हस्तशिल्प से अपनी आजीविका चला रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
उन्होंने कहा कि पिचवाई जैसी पारंपरिक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आवश्यकता है कि विश्वविद्यालयों, कलाकारों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से इन कलाओं को आधुनिक शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को भी पारंपरिक कला एवं शिल्प के क्षेत्र में प्रशिक्षण और नए अवसर प्राप्त होंगे।
