मध्य प्रदेश। में करीब 150 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया है। पशु चिकित्सकों ने ट्रांसफर नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को अभ्यावेदन सौंपा है। अधिकारियों की ओर से उन्हें अभ्यावेदनों की जांच के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।
पशु चिकित्सकों का कहना है कि तबादलों के बाद कई अधिकारियों ने अभी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की है। इसका असर कई जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की संख्या कम होने से पशुओं के इलाज और विभागीय कामकाज में परेशानी आने की बात कही गई है।
तबादलों को लेकर सबसे बड़ा आरोप सार्थक ऐप में दर्ज जानकारी और उसके आधार पर तैयार सूची को लेकर है। चिकित्सकों का दावा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ छुट्टियों को अनुपस्थिति के तौर पर दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी जानकारी प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि इसी तरह की विसंगतियों के आधार पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना तय की गई।
पशु चिकित्सकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानवीय आधारों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को 700 से 1300 किलोमीटर तक दूर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को कथित तौर पर तबादला सूची से बाहर रखा गया। इस कारण विभाग के भीतर समान अवसर और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।
महिला और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े मामलों को लेकर भी चिकित्सकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सीहोर में पदस्थ रहीं पशु चिकित्सक रश्मि देवी चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने अनूपपुर के आदिवासी क्षेत्र में करीब 11 वर्ष सेवाएं दी हैं। उनका दावा है कि नीति में तलाकशुदा महिलाओं के लिए यथासंभव अनुकूल स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान होने के बावजूद उनका तबादला सिंगरौली किया जा रहा है।
इसी तरह कुछ अन्य पशु चिकित्सकों ने बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए तबादलों से होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी है। डॉ. राखी सिंह और डॉ. कमल सिंह का कहना है कि उनके बच्चों की पढ़ाई भोपाल में चल रही है और स्कूल तथा कोचिंग के बीच अचानक दूसरे स्थान पर जाना परिवार के लिए मुश्किल होगा।
पशु चिकित्सक उदय सिंह माहेश्वरी ने भी अपने तबादले को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि वे सीहोर जिला पशु चिकित्सक संघ के अध्यक्ष हैं और उनके बच्चों की शिक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी उन पर हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर तबादला होने से उनके सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो गई हैं।
चिकित्सकों ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ तबादले प्रक्रिया के अंतिम समय में किए गए और नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इतनी कम अवधि में दूरस्थ जिलों में पहुंचना कई अधिकारियों के लिए मुश्किल है। कुछ मामलों में ऑनलाइन उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के भौतिक सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
तबादलों के कारण कई जिलों में पद खाली होने की स्थिति बनने का दावा भी किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले से सीमित संख्या में अधिकारी तैनात थे और स्थानांतरण के बाद वहां पशु चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विभागीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की जा रही है। जांच में स्थानांतरण प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की नजर जांच के परिणाम और संभावित संशोधन पर बनी हुई है।
