मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में पांडे ने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन बाजार की माइक्रोस्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव है और नियामक इस व्यवस्था के पीछे मजबूती से खड़ा है। उनके मुताबिक दुनिया के कई प्रमुख बाजार पहले से इस तरह की प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। जापान ने 2024 में इसे लागू किया था, जबकि हांगकांग, अमेरिका, जर्मनी, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी क्लोजिंग ऑक्शन जैसी व्यवस्था मौजूद है।
सेबी प्रमुख ने कहा कि किसी शेयर के क्लोजिंग प्राइस का सही और निष्पक्ष निर्धारण पूंजी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कीमत के आधार पर कई प्रमुख शेयर सूचकांकों, पैसिव निवेश उत्पादों और म्यूचुअल फंडों की नेट एसेट वैल्यू तय होती है। ऐसे में दिन के अंतिम मूल्य को अधिक पारदर्शी तरीके से निर्धारित करने की जरूरत रहती है।
नई व्यवस्था में नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद 20 मिनट का विशेष क्लोजिंग ऑक्शन सेशन आयोजित किया जाता है। इस दौरान शेयरों की खरीद और बिक्री से जुड़े ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं और उस स्तर पर क्लोजिंग प्राइस निर्धारित किया जाता है, जहां अधिकतम संभव मात्रा में सौदों का मिलान हो सके। इसका उद्देश्य बाजार बंद होने के समय किसी शेयर के उचित मूल्य का बेहतर निर्धारण करना है।
इससे पहले क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने के लिए नियमित कारोबार के अंतिम 30 मिनट के दौरान हुए सौदों के भारित औसत मूल्य को आधार बनाया जाता था। नई व्यवस्था इसी प्रक्रिया का स्थान लेती है और अंतिम कीमत तय करने में ऑर्डर मिलान की प्रक्रिया को अधिक प्रमुख भूमिका देती है।
पांडे ने कहा कि इस समय सेबी का मुख्य ध्यान नई प्रणाली में बाजार सहभागिता बढ़ाने पर है। कई ब्रोकरों की ओर से भी यह संकेत मिला है कि निवेशकों और अन्य बाजार प्रतिभागियों की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है। नियामक का मानना है कि व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित होने के साथ इसमें भागीदारी भी बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें बाजार गतिविधियां दिखाई देती हैं और उपलब्ध खरीद तथा बिक्री आदेशों के आधार पर निष्पक्ष मूल्य निर्धारित करने का प्रयास किया जाता है। सेबी इस व्यवस्था के संचालन की लगातार निगरानी कर रही है और बाजार से मिलने वाले फीडबैक का भी आकलन किया जा रहा है।
सेबी प्रमुख के अनुसार नियामक विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। यदि व्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने या प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत महसूस होती है तो उन सुझावों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसी हेरफेर के प्रमाण नहीं मिलने को उन्होंने बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
नई व्यवस्था का महत्व विशेष रूप से उन बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए भी माना जा रहा है, जिनके बड़े ऑर्डर अक्सर कारोबारी सत्र के अंतिम समय में निष्पादित होते हैं। नियामक की उम्मीद है कि अधिक भागीदारी और बेहतर समझ के साथ क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भारतीय पूंजी बाजार में मूल्य निर्धारण को अधिक कुशल, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद करेगा।
