पेट फूलने की सबसे आम वजह पाचन तंत्र में गैस का बढ़ना मानी जाती है। कुछ खाद्य पदार्थ आंतों में ज्यादा गैस पैदा कर सकते हैं जबकि खाना खाते समय बहुत तेजी से खाने या बातचीत करते हुए ज्यादा हवा निगलने से भी पेट में फुलाव महसूस हो सकता है। इसके अलावा कब्ज की समस्या में आंतों में मल जमा रहने के कारण पेट भारी और फूला हुआ लग सकता है। कुछ लोगों को दूध या अन्य खाद्य पदार्थों को पचाने में परेशानी होती है जिसकी वजह से भी ब्लोटिंग बढ़ सकती है।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS भी बार बार पेट फूलने की एक महत्वपूर्ण वजह हो सकती है। इस स्थिति में पेट फूलने के साथ पेट दर्द और शौच की आदतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ लोगों को लगातार कब्ज की परेशानी रहती है जबकि कुछ लोगों को बार बार दस्त हो सकते हैं। तनाव खानपान में गड़बड़ी और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी इसके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। अगर लंबे समय से पेट दर्द के साथ शौच के तरीके में बदलाव हो रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पेट फूलने की समस्या सीलिएक डिजीज से भी जुड़ी हो सकती है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें ग्लूटेन के सेवन के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत को नुकसान पहुंचाने लगती है। ग्लूटेन गेहूं जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला प्रोटीन है। इस स्थिति में पेट फूलने के साथ दस्त पेट की परेशानी और वजन कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और आहार में जरूरी बदलाव किए जाते हैं।
कुछ मामलों में लगातार बढ़ता हुआ पेट लिवर से जुड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। लिवर की गंभीर समस्या में पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा हो सकता है जिसे जलोदर कहा जाता है। इसकी वजह से पेट धीरे धीरे बढ़ा हुआ दिखाई दे सकता है और पेट भारी या तना हुआ महसूस हो सकता है। इसके साथ पैरों में सूजन त्वचा या आंखों में पीलापन कमजोरी और भूख कम लगने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।
इसलिए अगर पेट फूलने की समस्या कभी कभार होती है और सामान्य खानपान में बदलाव से ठीक हो जाती है तो बहुत ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर ब्लोटिंग लगातार बनी हुई है या इसके साथ तेजी से वजन कम होना मल में खून आना बार बार उल्टी होना तेज पेट दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। केवल घरेलू नुस्खों के सहारे समस्या को दबाने के बजाय उसके वास्तविक कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है। सही समय पर कारण की पहचान और उपचार से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
