रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया की यह फ्लाइट फुकेट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे। उड़ान के दौरान विमान को अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा और इसी दौरान करीब 300 फीट की ऊंचाई का नुकसान हुआ। अचानक हुए इस बदलाव से केबिन में अफरा तफरी मच गई। कई यात्रियों और क्रू सदस्यों को चोटें आईं। हालांकि पायलटों ने स्थिति को संभाल लिया और विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया।
जांच से जुड़े शुरुआती विवरणों में सामने आया है कि विमान में ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया था। इसके बाद को पायलट ने विमान को मैनुअली नियंत्रित किया। इसी दौरान फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी चेतावनी भी सामने आई। कुछ इंडिकेटर स्विच थोड़े समय के लिए बंद हुए और विमान को तकनीकी गड़बड़ियों के साथ टर्बुलेंस का भी सामना करना पड़ा। इन घटनाओं का आपस में क्या संबंध था और इनमें से किस कारण से विमान की ऊंचाई अचानक कम हुई इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सबसे महत्वपूर्ण जानकारी विमान के हाइड्रॉलिक सिस्टम को लेकर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार उड़ान के दौरान तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम में फेलियर हुआ। विमान में हाइड्रॉलिक सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए कई जरूरी मैकेनिकल और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम संचालित होते हैं। तीनों सिस्टम में एक साथ समस्या सामने आना घटना की गंभीरता को बढ़ाता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हाइड्रॉलिक सिस्टम की खराबी और विमान के 300 फीट नीचे जाने के बीच सीधा कारणात्मक संबंध क्या था।
इस घटना के बाद AAIB ने जांच शुरू कर दी है। विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। विमान निर्माता एयरबस भी जांच में तकनीकी सहायता दे रहा है। फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA की विशेषज्ञ टीम भी जांच में सहयोग कर रही है। इन रिकॉर्डिंग और तकनीकी आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटना के दौरान विमान के सिस्टम किस क्रम में प्रभावित हुए और पायलटों के सामने कौन कौन सी चेतावनियां आईं।
फिलहाल इस घटना को लेकर किसी एक वजह को अंतिम कारण नहीं माना गया है। जांच एजेंसियां तकनीकी गड़बड़ियों के साथ मौसम और टर्बुलेंस समेत सभी पहलुओं को देख रही हैं। विमान के सुरक्षित दिल्ली पहुंचने के बावजूद घटना ने विमान सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आने वाले दिनों में जांच से सामने आने वाली जानकारी यह स्पष्ट कर सकती है कि 300 फीट की अचानक ऊंचाई गिरने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और विमान में सामने आई अलग अलग तकनीकी समस्याओं की इसमें कितनी भूमिका रही।
