नई दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की अपनी पुरानी नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार उन्होंने किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात की। सोमवार को उन्होंने भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से अलग बैठक की। इस दौरान दोनों के बीच भारत और नेपाल के संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान नवीन श्रीवास्तव ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ बेहतर संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। बालेन शाह ने भी दोनों देशों के बीच पुराने और भरोसेमंद रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया।
नेपाल और भारत के बीच व्यापार, ऊर्जा, सड़क और विकास परियोजनाओं को लेकर लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद भारतीय राजदूत के साथ बालेन शाह की पहली व्यक्तिगत बैठक को दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बालेन शाह इससे पहले विदेशी अधिकारियों और राजदूतों से अकेले मुलाकात करने से परहेज करते रहे थे। प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में उन्होंने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठक नहीं करने की नीति अपनाई थी। विदेशी राजदूतों के साथ भी वह सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे।
इसी नीति के तहत भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की मई में नेपाल यात्रा के दौरान भी बालेन शाह ने उनसे अलग मुलाकात नहीं की थी। इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित कुछ व्यक्तिगत बैठकों को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया था। इसके बजाय उन्होंने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं।
बालेन शाह की इस नीति के पीछे उनका यह तर्क बताया जाता रहा है कि बड़े और प्रभावशाली देशों के प्रतिनिधि नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। सामूहिक बैठकों के जरिए वह सभी देशों के साथ समान व्यवहार और नेपाल की संप्रभुता का संदेश देना चाहते थे।
हालांकि, सरकार गठन के करीब 100 दिन पूरे होने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखाई देने लगा। सलाहकारों की ओर से घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों के साथ सीधे संवाद बढ़ाने की सलाह के बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों के साथ सीधी मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद बालेन शाह चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी अलग बैठक करने वाले हैं। भारत और चीन दोनों नेपाल के प्रमुख पड़ोसी और महत्वपूर्ण साझेदार हैं। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ व्यक्तिगत संवाद का कार्यक्रम नेपाल की संतुलित विदेश नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेपाल में लंबे समय से प्रधानमंत्री और बड़े देशों के राजदूतों के बीच सीधे संवाद की परंपरा रही है। कई बार ऐसी बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर भी होती रही हैं। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी नहीं होती थी और कुछ मुलाकातों का औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था।
बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव आया था, लेकिन अब उनकी नीति फिर बदलती नजर आ रही है। भारत और चीन के राजदूतों के साथ सीधे संवाद से यह संकेत मिलता है कि नेपाल सरकार महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मामलों पर सामूहिक बैठकों के साथ व्यक्तिगत कूटनीतिक संपर्क को भी जगह दे रही है।
