जिजान में अरामको रिफाइनरी से जुड़ी सुविधा पर ड्रोन हमला
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि हमलों में सऊदी सैनिकों की मौजूदगी वाले इलाकों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इसी दौरान सऊदी अरब के जिजान में स्थित अरामको रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा पर ड्रोन हमला किए जाने का भी दावा किया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की। हालांकि, आग पर बाद में काबू पा लिया गया। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
मोखा बंदरगाह पर हमले में 7 लोगों की मौत
हूतियों के हमले का दूसरा बड़ा निशाना यमन का मोखा बंदरगाह बना। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के नियंत्रण में है और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के करीब स्थित है। यमनी सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई। मृतकों में चार सैनिक और तीन नागरिक शामिल हैं। वहीं, 30 नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले में बंदरगाह की इमारतों, पियर्स और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा।
मिसाइल और ड्रोन के साथ मानवरहित नाव का भी दावा
हूतियों ने इन हमलों को सऊदी ड्रोन के यमन के हज्जाह और सादा प्रांतों में घुसने की कार्रवाई का जवाब बताया है। यमनी सेना के मुताबिक, हमले में मिसाइल और ड्रोन के अलावा विस्फोटकों से लदी एक मानवरहित नाव के इस्तेमाल की कोशिश भी की गई। जारी वीडियो में हूती लड़ाकों को अलग-अलग स्थानों से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते हुए दिखाया गया है। इससे संगठन की हमले करने की रणनीति और इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
2022 के बाद फिर बढ़ सकती है क्षेत्रीय अशांति
इन घटनाओं ने यमन में 2022 के बाद से बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोखा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब के नजदीक है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में यदि इलाके में हूती हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्गों के साथ-साथ क्षेत्र की शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।
