FSSAI का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हेल्दी या नैचुरल जैसे शब्द लिखना स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई कंपनी ऐसा करती है तो उसे अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण भी देने होंगे।
हाल के दिनों में FSSAI ने ब्रेड नूडल्स चॉकलेट जूस कुकिंग ऑयल सप्लीमेंट्स पैकेज्ड पानी और कैफीन युक्त पेय पदार्थ बनाने वाली कई कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें खास तौर पर 100 प्रतिशत नैचुरल प्योर फ्रेश ऑर्गेनिक हेल्दी हार्ट हेल्दी डिटॉक्स एंटी कैंसर और जीरो मैदा जैसे दावों पर सवाल उठाए गए हैं। नियामक संस्था यह जानना चाहती है कि क्या इन उत्पादों की सामग्री और निर्माण प्रक्रिया वास्तव में इन दावों के अनुरूप है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश उपभोक्ता पैकेट के सामने लिखी बातों पर भरोसा कर लेते हैं लेकिन पीछे दिए गए पोषण संबंधी विवरण और सामग्री सूची को पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। इसी का फायदा कई कंपनियां उठाती हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे हेल्थ हेलो इफेक्ट कहते हैं जिसमें किसी एक आकर्षक शब्द के कारण पूरा उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक दिखाई देने लगता है जबकि वास्तविकता अलग हो सकती है।
डाइट विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदने से पहले उसकी सामग्री सूची अवश्य पढ़नी चाहिए। पैकेट पर सबसे पहले जिस सामग्री का नाम लिखा होता है उसकी मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके अलावा शुगर नमक सैचुरेटेड फैट ट्रांस फैट प्रोटीन और कैलोरी की जानकारी भी ध्यान से देखनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद के सामने बड़े बड़े दावे लिखे हों लेकिन पीछे उनका कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण न दिया गया हो तो ऐसे उत्पाद से सावधान रहना चाहिए।
अगर किसी उत्पाद पर ऑर्गेनिक लिखा है तो उसके पास मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र होना जरूरी है। इसी तरह हेल्दी या हार्ट हेल्दी जैसे दावे भी तभी किए जा सकते हैं जब उत्पाद निर्धारित पोषण मानकों पर खरा उतरता हो। इसलिए केवल विज्ञापन या पैकेजिंग देखकर निर्णय लेना समझदारी नहीं है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि उपभोक्ता खरीदारी करते समय केवल कीमत या ऑफर पर ध्यान न दें बल्कि लेबल को पढ़ने की आदत भी विकसित करें। इससे न केवल सही उत्पाद चुनने में मदद मिलेगी बल्कि भ्रामक दावों से भी बचा जा सकेगा। बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि गलत जानकारी के आधार पर चुना गया खाद्य पदार्थ उनकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
FSSAI की यह कार्रवाई केवल कंपनियों पर निगरानी रखने के लिए नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब समय आ गया है कि खरीदारी करते समय चमकदार पैकेजिंग और बड़े बड़े दावों से प्रभावित होने के बजाय उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और पोषण संबंधी जानकारी को प्राथमिकता दी जाए। जागरूक ग्राहक ही सही और सुरक्षित भोजन का चुनाव कर सकता है।
