मंदिर में अखंड जाप की यह पावन परंपरा 1 अगस्त 1964 को शुरू की गई थी। तब से लेकर आज तक, दिन हो या रात, श्री राम, जय राम, जय जय राम की रामधुन निरंतर गूंज रही है। इस संकीर्तन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए साधक, पुजारी और श्रद्धालु बारी-बारी से बैठते हैं, जिससे जाप की गति एक क्षण के लिए भी धीमी या बंद नहीं होती। चौबीसों घंटे चलने वाले इस सबसे लंबे अखंड कीर्तन के कारण मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।
इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान की नींव महान संत श्री प्रेमभिक्षुजी महाराज ने रखी थी। उन्होंने समाज में आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर भक्ति के विस्तार के लिए इस निरंतर संकीर्तन की शुरुआत की थी। स्थानीय निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में गूंजने वाले राम नाम के महामंत्र और दिव्य वातावरण के प्रभाव से ही जामनगर शहर हमेशा बड़ी प्राकृतिक आपदाओं और संकटों से सुरक्षित रहता है।
संत प्रेमभिक्षुजी महाराज द्वारा शुरू की गई यह पावन परंपरा केवल जामनगर तक ही सीमित नहीं रही। उनकी प्रेरणा से गुजरात के द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़ और महुवा के साथ-साथ बिहार के मुजफ्फरपुर में भी इसी तरह के मंदिरों की स्थापना की गई, जहां 24 घंटे अखंड रामधुन का गायन होता है। देश के 40 से अधिक छोटे-बड़े शहरों में रोजाना विशेष संकीर्तन सभाओं का आयोजन किया जाता है।
मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचकर अद्भुत मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दिन-रात खुले रहते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्त किसी भी समय रात्रि में रुककर संकीर्तन का हिस्सा बन सकते हैं। रामनवमी, हनुमान जयंती और विजयदशमी जैसे बड़े पर्वों पर यहां आस्था का भारी सैलाब उमड़ता है।
