मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने हाल ही में सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अभियान की रूपरेखा स्पष्ट की। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा और इस दौरान प्रशासन की कार्यशैली का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टरों का मूल्यांकन केवल शिकायतों के निपटारे की संख्या के आधार पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि शिविरों, जनसंवाद कार्यक्रमों और फील्ड विजिट के बाद संबंधित क्षेत्र में लंबित शिकायतों में वास्तव में कितनी कमी आई। इसके साथ ही यह भी परखा जाएगा कि आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ और जिले में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए प्रशासन ने कितना प्रभावी काम किया।
मूल्यांकन के प्रमुख पैमानों में लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था, शिकायतों के त्वरित समाधान, विभागीय समन्वय, आर्थिक विकास की रफ्तार और जनता के बीच प्रशासन की स्वीकार्यता शामिल रहेगी। सरकार कलेक्टरों की संवेदनशीलता और आम लोगों के साथ उनके व्यवहार को भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगी। यानी केवल फाइलों में उपलब्ध आंकड़े ही नहीं, बल्कि जमीनी असर भी परखा जाएगा।
अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार को विकासखंड और क्लस्टर स्तर तक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रोस्टर तैयार होगा और जनसंवाद शिविरों में मिलने वाले नए आवेदनों का पंजीयन कर अगली यात्रा से पहले उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई मामला जिला स्तर पर हल नहीं हो सकता तो उसे संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या विभागाध्यक्ष के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा।
सरकार ने विभाग प्रमुखों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने विभागों की संस्थाओं के निरीक्षण के लिए मानक प्रारूप तैयार करेंगे, जबकि संभागायुक्त नियमित रूप से जिलों का दौरा कर अभियान की निगरानी करेंगे। साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी जिलों में पहुंचकर निरीक्षण, समीक्षा और जनसंवाद कार्यक्रमों में भाग लेंगे। जहां मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्वयं दौरा करेंगे, वहां पूरे जिले की व्यापक समीक्षा के साथ ऑनलाइन समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
जनविश्वास अभियान के तहत उद्योग और रोजगार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय कुटीर उद्योगों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों के साथ संवाद कर लाइसेंस, एनओसी, लोक सेवा गारंटी और अन्य प्रशासनिक अड़चनों का समाधान किया जाएगा, ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक निगरानी करना नहीं, बल्कि ऐसा प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करना है, जिसमें प्रत्येक जिला बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करे। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनसेवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। जनविश्वास अभियान इस लिहाज से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल साबित हो सकता है।
