रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।
AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।
हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।
चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
