कॉमनवेल्थ गेम्स में चमके हर्ष सिंह, पुरुष जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण
नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका और ओलंपियन जोशुआ कात्ज़ को पराजित कर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुष जूडो में भारत का पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
23 वर्षीय हर्ष सिंह दिल्ली के रहने वाले हैं और अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (IJF) के सर्किट में भारत के उभरते खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले वह कई ग्रैंड स्लैम और ग्रैंड प्रिक्स प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा से मिले अनुभव का लाभ उन्हें ग्लासगो में देखने को मिला।
41 सेकेंड में पलटा मुकाबला
फाइनल मुकाबले में हर्ष का सामना ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कात्ज़ से हुआ, जिन्हें इस स्पर्धा का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। चार मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही और अंतिम क्षणों तक कोई निर्णायक बढ़त नहीं बन सकी।
मैच समाप्त होने से 41 सेकेंड पहले हर्ष ने प्रतिद्वंद्वी की एक छोटी सी चूक का फायदा उठाते हुए ‘वाजा-अरी’ (Waza-ari) स्कोर किया। इसके बाद उन्होंने शेष समय तक बढ़त बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक जीत लिया।
अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को दी मात
जोशुआ कात्ज़ ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका हैं। वह कई बार ओशिनिया चैंपियन रह चुके हैं और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके परिवार का भी जूडो से गहरा संबंध रहा है और उनके पिता ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक जूडो टीम के राष्ट्रीय कोच रह चुके हैं।
भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन
हर्ष सिंह की इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इससे पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पहली सफलता दिलाई थी। इसके बाद हर्ष ने पुरुष वर्ग में स्वर्ण जीतकर एक ही दिन में भारत को जूडो में दो स्वर्ण पदक दिलाने का इतिहास रच दिया।
कम उम्र में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में उतरकर स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष सिंह की यह सफलता भारतीय जूडो के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे आने वाले खिलाड़ियों को भी नई प्रेरणा मिलेगी।
