उपग्रह से मिली झील की नई तस्वीर
हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के Landsat 9 उपग्रह में लगे ओएलआई सेंसर ने 16 फरवरी 2026 को अंटार्कटिका की गर्मियों के दौरान इस झील की तस्वीर ली। इस तस्वीर में बर्फ से ढकी झील और उसके आसपास का ठंडा व बंजर परिदृश्य साफ दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार झील का अधिकांश पानी पास स्थित अनुचिन ग्लेशियर के मौसमी पिघलाव से आता है। सूरज की रोशनी बर्फ की परत से होकर नीचे पानी तक पहुंचती है और उसे थोड़ा गर्म करती है, लेकिन तेज हवाएं और बेहद ठंडी सतह वाष्पीकरण और सब्लिमेशन की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इसी कारण झील की सतह पर बर्फ ज्यादा नहीं पिघलती।
झील की गहराई और अनोखी रासायनिक संरचना
नासा की वेबसाइट के अनुसार इस झील की अधिकतम गहराई लगभग 558 फीट तक मापी गई है। इसकी सबसे खास बात इसके पानी की अनोखी रासायनिक संरचना है। झील में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर काफी ज्यादा है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। इसके अलावा झील का पीएच स्तर काफी एल्कलाइन यानी क्षारीय है। दुनिया में बहुत कम झीलें ऐसी हैं जो पूरे साल जमी रहती हैं और जिनमें बड़े आकार के स्ट्रोमेटोलाइट्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि यह झील वैज्ञानिकों के लिए विशेष महत्व रखती है।
3 अरब साल पुराने जीवन का संकेत
इस झील में पाए जाने वाले स्ट्रोमेटोलाइट्स दरअसल सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाई गई संरचनाएं होती हैं। इन्हें फोटोसिंथेटिक साइनोबैक्टीरिया बनाते हैं, जो चिपचिपी सतह पर तलछट को फंसा कर कैल्शियम कार्बोनेट की परतें बनाते हैं। समय के साथ ये संरचनाएं ऊपर की ओर बढ़ती जाती हैं और ऑक्सीजन छोड़ती हैं। वर्ष 2011 में Dale Andersen और उनकी टीम ने यहां इन विशाल स्ट्रोमेटोलाइट्स की खोज की थी। इनकी ऊंचाई लगभग आधा मीटर तक हो सकती है, जबकि अंटार्कटिका की अन्य झीलों जैसे Lake Joyce में ये केवल कुछ सेंटीमीटर ऊंचे पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संरचनाएं पृथ्वी पर 3 अरब साल पहले मौजूद शुरुआती जीवन की झलक दिखाती हैं।
कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाले जीव
इस झील में बड़े जीवों के रूप में टार्डिग्रेड्स पाए जाते हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे मजबूत जीवों में गिना जाता है। ये बेहद कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि झील के साफ पानी, कम तलछट, सीमित रोशनी और बर्फ की मोटी परत के कारण यहां स्ट्रोमेटोलाइट्स असामान्य रूप से बड़े आकार में विकसित हो पाते हैं। यही कारण है कि यह झील सूक्ष्मजीवों के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भी अहम
एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इस झील को अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने के लिए एक मॉडल के रूप में देखते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह झील Europa और Enceladus जैसे बर्फीले चंद्रमाओं या Mars पर कभी मौजूद रही प्राचीन बर्फीली झीलों के अध्ययन के लिए उपयोगी उदाहरण हो सकती है। इन जगहों पर भी बर्फ के नीचे पानी और सूक्ष्मजीवी जीवन की संभावना जताई जाती है।
झील में अचानक आने वाले बदलाव
हालांकि यह झील बाहर से स्थिर दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर कभी-कभी बड़े बदलाव भी होते हैं। वर्ष 2019 में University of Ottawa के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यहां विस्तृत फील्ड रिसर्च की थी। ICESat-2 के डेटा से पता चला कि पास की Lake Obersee के फटने से लगभग 1.75 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी अचानक इस झील में आ गया था। इस घटना से झील के पीएच स्तर और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बदलाव आया, जिससे सूक्ष्मजीवी जीवन की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई।
पर्यावरण के लिए चेतावनी भी
वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियल झीलों के अचानक फटने से आने वाली ऐसी बाढ़ अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए इस क्षेत्र में लगातार निगरानी और शोध की जरूरत है। इसके बावजूद लेक अन्टरसी आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्यमयी और अनमोल प्राकृतिक प्रयोगशाला बनी हुई है, जहां पृथ्वी के शुरुआती जीवन के रहस्यों को समझने की नई संभावनाएं छिपी हुई हैं।
