अपने हर विचार को बिना किसी झिझक के साझा करने के लिए पहचानी जाने वाली सोमी अली ने एक हालिया साक्षात्कार में बाल शोषण की इस वीभत्स हकीकत पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि यह दर्दनाक सिलसिला तब शुरू हुआ जब वह महज चार वर्ष की थीं। इसके बाद, जब वह पांच वर्ष की हुईं, तो उनके घर के मुख्य रसोइए (खानसामे) ने उनके साथ कई बार अनैतिक और गंदी हरकतें कीं। यहीं पर यह ज्यादती नहीं रुकी, बल्कि जब वह नौ वर्ष की आयु में पहुंचीं, तो घर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बहला-फुसफुसाकर सर्वेंट क्वार्टर में ले जाकर शारीरिक रूप से गंभीर प्रताड़ना दी। इन घटनाओं ने उनके बाल मन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया था।
इस दर्दनाक घटनाक्रम के दौरान पारिवारिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई के अभाव पर बात करते हुए पूर्व अभिनेत्री ने बताया कि उस दौर में उनके पिता एक संपन्न फिल्म निर्माता, निर्देशक और वितरक थे और उनका परिवार एक भव्य बहुमंजिला इमारत में निवास करता था। जब उन्होंने पहली बार अपनी मां के माध्यम से और बाद में इंटरकॉम पर अपने पिता को रसोइए अब्दुल द्वारा चूजे दिखाने के बहाने कमरे में ले जाकर तीन बार की गई इस हैवानियत के बारे में सूचित किया, तो उनके पिता ने आरोपी को कानूनी रूप से पुलिस के हवाले करने के बजाय एक अनुचित और हिंसक मार्ग चुना।
सोमी अली के अनुसार, उनके पिता ने आरोपी रसोइए को अन्य कर्मचारियों के माध्यम से सेट पर ही अत्यधिक लहूलुहान होने तक पिटवाया और बिना किसी पुलिस शिकायत के नौकरी से निष्कासित कर दिया। एक पांच वर्ष की अबोध बच्ची के लिए अपने सामने इस प्रकार का अत्यधिक खून-खराबा और मारपीट देखना एक अन्य गहरे मनोवैज्ञानिक आघात (ट्रॉमा) का कारण बन गया। इससे भी अधिक दुखद स्थिति तब उत्पन्न हुई जब नौ वर्ष की आयु में उनके साथ दोबारा ऐसी ही घटना घटी और उनकी माता ने इस विषय पर वैधानिक कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें लोकलाज के डर से पूरी तरह चुप रहने की नसीहत दे डाली।
साक्षात्कार के दौरान सोमी अली ने भारतीय और दक्षिण एशियाई समाज की इस रूढ़िवादी और शोषक मानसिकता पर गहरा क्षोभ और दुख व्यक्त किया, जहां पीड़ित बच्ची को ही यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि यदि समाज को इस सच का पता चला तो भविष्य में कोई उससे विवाह नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता का यह सुरक्षाहीन रवैया और सामाजिक दृष्टिकोण बच्चों के मानसिक विकास पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव डालता है। अपने इस सच को सार्वजनिक करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य समाज में बाल सुरक्षा के प्रति चेतना जागृत करना और पीड़ित बच्चों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भविष्य में कोई अन्य बच्चा इस प्रकार के एकाकी संघर्ष और आघात से न गुजरे।
