केंद्रीय गृह मंत्रालय के सीधे निर्देशों और प्राथमिकताओं के बाद बीएसएफ ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रारंभिक व्यवहार्यता (फीजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार करने और तकनीकी व्यवहार्यता का गहराई से अध्ययन करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में सुंदरबन के इस विस्तृत और दुर्गम नदी क्षेत्र में फेंसिंग न होने के कारण सुरक्षा बल मुख्य रूप से फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट (एफबीओपी) यानी तैरती हुई सीमा चौकियों और विशेष नौकाओं के माध्यम से गश्त करते हैं। नए मास्टर प्लान के तहत अब समुद्री गश्त को और अधिक आक्रामक बनाने के साथ-साथ पूरे इलाके को आधुनिक तकनीकी निगरानी व्यवस्था से लैस किया जाएगा।
इस वृहद सुरक्षा योजना को गति देने के उद्देश्य से बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने स्वयं सुंदरबन के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का चार दिवसीय दौरा कर सुरक्षा तैयारियों की जमीनी समीक्षा की है। इस उच्च स्तरीय दौरे में सीमा सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ-साथ प्रस्तावित फेंसिंग कार्य को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर रणनीतिक चर्चा की गई। बैठक में नदी क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाने, अतिरिक्त सर्चलाइटें लगाने और अत्याधुनिक नाइट-विज़न सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस सीमा रेखा का लगभग 71 किलोमीटर लंबा हिस्सा सुंदरबन वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसके कारण निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर आए बदलावों के बाद इस लंबित परियोजना की गति में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। पहले संयुक्त भूमि सर्वेक्षण के लिए आवश्यक अनुमतियां न मिलने के कारण यह परियोजना काफी समय तक अधर में लटकी हुई थी। हालांकि सुंदरबन को घुसपैठ का पारंपरिक या मुख्य मार्ग नहीं माना जाता है, लेकिन इसकी भौगोलिक बनावट का फायदा उठाकर तस्कर और अंतरराष्ट्रीय अपराधी अक्सर इसका उपयोग प्रतिबंधित सामानों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए करते रहे हैं, जिसे रोकना बेहद अनिवार्य हो गया था।
इस बीच, फेंसिंग योजना को लेकर स्थानीय आबादी और व्यापारिक संगठनों के बीच भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ चिंताएं और आशंकाएं भी उभर कर सामने आई हैं। सीमा से सटे क्षेत्रों में रह रहे कई स्थानीय परिवारों और वहां पर्यटन व्यवसाय से जुड़े मध्यम आकार के होटल एवं लॉज संचालकों ने संभावित विस्थापन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने जनसंवाद के माध्यम से उन्हें आश्वस्त किया है कि सभी प्रभावित लोगों को नियमों के अनुसार उचित मुआवजा और बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था प्रदान की जाएगी। सीमा सुरक्षा बल और राज्य के सिंचाई विभाग की एक संयुक्त टीम जल्द ही इस पूरी भूमि का विस्तृत सर्वेक्षण कार्य शुरू करने जा रही है।
