इसी मुद्दे पर भोपाल में लोगों की राय भी सामने आई। अधिकांश लोगों ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि कोई उस चढ़ावे में हेराफेरी करता है तो वह केवल कानून नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का भी अपराधी है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कई लोगों ने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक संस्थानों की पवित्रता से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
कुछ नागरिकों ने भरोसा जताया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है तो उससे जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इस बीच जांच एजेंसियां पूरे मामले के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित अनियमितता को लोग बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि मंदिरों में आने वाले दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।
