डीएम ने अस्पताल संचालकों के साथ बैठक कर दिए निर्देश, बिना फायर एनओसी संचालन पर चेतावनी
आईसीयू, ओटी व वार्डों में फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
नियम तोड़ने पर जुर्माना और पंजीकरण निरस्त करने की दी हिदायत
झांसी। जनपद के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों में फायर सेफ्टी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कलेक्ट्रेट गांधी सभागार में संचालकों एवं चिकित्सकों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि झांसी बुंदेलखंड का प्रमुख मेडिकल हब है, इसलिए मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने निर्देश दिए कि 50 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पताल अनिवार्य रूप से फायर एनओसी प्राप्त करें। प्रत्येक तल पर आईएसआई मार्क वाले फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, हूटर और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए जाएं। आईसीयू, एनआईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश व निकास की अलग व्यवस्था हो तथा वहां किसी भी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री न रखी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेसमेंट का उपयोग मरीजों के वार्ड के रूप में नहीं, बल्कि केवल पार्किंग या स्टोर के लिए किया जाए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी आर.के. राय ने अस्पतालों में छह माह के अंतराल पर विद्युत वायरिंग की जांच, स्टाफ को नियमित मॉक ड्रिल प्रशिक्षण और यूपीएस व जनरेटर के लिए अलग फायर प्रूफ कक्ष बनाने की सलाह दी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पल्लवी मिश्रा ने वार्षिक फायर ऑडिट रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय में जमा कराने और आपातकालीन निकास मार्ग हर समय खुला रखने के निर्देश दिए।
डीएम ने चेतावनी दी कि मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम-2022 के तहत 50 हजार से पांच लाख रुपये तक जुर्माना तथा पंजीकरण निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में 70 से अधिक नर्सिंग होम संचालक एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।
