जोहरा सहगल का जन्म वर्ष 1912 में हुआ था और उन्होंने भारतीय रंगमंच, सिनेमा तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक भी जोहरा सहगल की ऊर्जा और सकारात्मक सोच लोगों को प्रेरित करती रही। 97 वर्ष की आयु में दिए गए एक चर्चित इंटरव्यू में उनसे उनकी जिंदादिली और खुशमिजाज व्यक्तित्व का राज पूछा गया था। इस दौरान उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जीवन में हास्य और प्यार की भावना व्यक्ति को हमेशा युवा बनाए रखती है। उनके इस बेबाक जवाब ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और सोशल मीडिया से लेकर समाचार जगत तक चर्चा का विषय बन गया था।
जोहरा सहगल सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने लगभग 14 वर्षों तक थिएटर की दुनिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अभिनय का सफर कई यादगार फिल्मों और टीवी धारावाहिकों से होकर गुजरा। उन्होंने ‘नीचा नगर’, ‘अफसर’, ‘दिल से’, ‘चीनी कम’ और ‘सांवरिया’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। इसके अलावा कई लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति दर्शकों को खूब पसंद आई।
सम्मानों की बात करें तो जोहरा सहगल को भारतीय कला और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री, कालिदास सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।
उनकी निजी जिंदगी भी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं थी। कला के प्रति लगाव ने उन्हें प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक उदय शंकर के दल तक पहुंचाया, जहां उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई। उम्र के अंतर और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों ने प्रेम विवाह किया और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया।
आज भले ही जोहरा सहगल हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी मुस्कान और जिंदगी को खुलकर जीने का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
