शुक्रवार को Election Commission of India के मध्यप्रदेश कार्यालय पहुंचकर दिग्विजय सिंह ने अधिकारियों से मुलाकात की और पूरे मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बाद जारी हुई मतदाता सूची में कई जगह गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। उनके अनुसार कुछ घरों में जहां केवल 6 से 8 लोग रहते हैं, वहां मतदाता सूची में 30 से 40 तक नाम दर्ज कर दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने करोंद क्षेत्र की रतन कॉलोनी के तीन मकानों के उदाहरण देते हुए कहा कि इन मामलों में मकान मालिकों ने बाकायदा शपथपत्र देकर बताया है कि उनके पते पर दर्ज कई मतदाता वहां कभी रहे ही नहीं। मकान नंबर 21 के मालिक हमीर सिंह यादव ने बताया कि उनके घर में कुल 6 कमरे हैं और परिवार के केवल चार सदस्य ही मतदाता हैं, जबकि सूची में लगभग 40 लोगों के नाम दर्ज बताए गए हैं। इसी तरह मकान नंबर 10 के मालिक कमलेश कुमार गुप्ता के अनुसार उनके घर में करीब आठ मतदाता रहते हैं, लेकिन मतदाता सूची में 36 नाम दर्ज हैं। वहीं मकान नंबर 2 के मालिक पोखन लाल साहू ने बताया कि उनके घर में सात मतदाता हैं, जबकि सूची में 37 नाम दर्ज किए गए हैं।
मकान मालिकों ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट कहा है कि जिन लोगों के नाम उनके पते पर दर्ज हैं, वे वहां कभी नहीं रहे और उन्हें उन व्यक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) ने घर-घर जाकर सही तरीके से सत्यापन नहीं किया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कथित फर्जी नाम मतदाता सूची में शामिल हो गए।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में नए नाम बिना उचित सत्यापन के जोड़ दिए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, फर्जी नामों को तुरंत हटाया जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दिग्विजय सिंह से शिकायत और दस्तावेज प्राप्त कर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। इस दौरान उनके साथ रतन कुमार गुप्ता, पोखन लाल साहू, देव नारायण विश्वकर्मा सहित कांग्रेस के अन्य नेता और स्थानीय शिकायतकर्ता भी मौजूद रहे। अब इस मामले में आयोग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता सूची में वास्तव में गड़बड़ी हुई है या नहीं।
