यह बच्चा, आदर्श मलक, पिछले कई महीनों से गंभीर न्यूरोलॉजिकल और आनुवंशिक समस्याओं से जूझ रहा है। उसकी स्थिति ऐसी है कि वह चलने-फिरने में असमर्थ है और पूरी तरह देखभाल पर निर्भर है। परिजनों के अनुसार, उसका इलाज इंदौर के एमवाय अस्पताल में चल रहा है।
परिवार ने बताया कि बच्चे को एक दुर्लभ बीमारी हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया (Hypohidrotic Ectodermal Dysplasia) है। इस बीमारी में शरीर की पसीना ग्रंथियां ठीक से विकसित नहीं हो पातीं, जिसके कारण मरीज को बहुत कम या बिल्कुल पसीना नहीं आता। यही वजह है कि गर्मी उसके लिए बेहद खतरनाक हो जाती है।
इसके अलावा इस बीमारी का असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है, जैसे दांतों का विकास, बालों की वृद्धि और त्वचा की संरचना। आदर्श की उम्र 11 साल होने के बावजूद उसका शारीरिक विकास सामान्य बच्चों की तुलना में काफी पीछे है और उसके दूध के दांत भी अभी तक पूरी तरह नहीं गिरे हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स में उसके मामले में डिमायलिनेटिंग डिजीज और गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों की आशंका भी जताई गई है। इन बीमारियों में नसों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे शरीर में कमजोरी और लकवे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
परिजनों ने बताया कि शनिवार को डॉक्टरों ने बच्चे को स्पाइन संबंधी इलाज के लिए सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल भेजने को कहा था। लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने और स्टाफ की देरी के कारण उन्हें मजबूरी में बच्चे को स्ट्रेचर पर ही ले जाना पड़ा। करीब एक किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल तक वे उसे धूप में धकेलते हुए ले गए।
इस दौरान उसकी मां लगातार गीले कपड़े से बच्चे के शरीर को ठंडा करने की कोशिश करती रहीं, क्योंकि आदर्श को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक गर्मी महसूस होती है और उसे पसीना नहीं आता।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चे का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वहीं, घटना के वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रबंधन ने यह भी जांच शुरू कर दी है कि मरीज को ट्रांसफर में देरी क्यों हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
फिलहाल आदर्श की स्थिति जटिल बनी हुई है, लेकिन डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में लगातार जुटी हुई है। यह मामला न केवल चिकित्सा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि एक परिवार के संघर्ष और मासूम की जिदंगी की लड़ाई को भी सामने लाता है।
