सूत्रों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क उन भारतीय इन्फ्लुएंसरों को निशाना बना रहा है जो सोशल मीडिया पर गोरक्षा और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। आरोप है कि ये इन्फ्लुएंसर लगातार पाकिस्तानी सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स और गैंगस्टरों को चुनौती देते रहे हैं, जिसके बाद उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) की कार्रवाई के बाद हुआ है। एटीएस ने 23 अप्रैल को नोएडा से दो आरोपियों तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और समीर खान—को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि ये दोनों आरोपी शहजाद भट्टी के संपर्क में थे और भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों को लखनऊ, दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और बिहार की कई संवेदनशील जगहों पर हमले की ट्रेनिंग दी गई थी। इसमें हैंड ग्रेनेड जैसे हथियारों के इस्तेमाल की तैयारी भी शामिल थी, जिससे सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
एटीएस को आरोपियों के मोबाइल से कई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली हैं, जिनमें भारतीय इन्फ्लुएंसरों को धमकाया जा रहा है। इनमें गाजियाबाद के दो यूट्यूबर अभिषेक ठाकुर और दक्ष चौधरी का नाम विशेष रूप से सामने आया है। रिकॉर्डिंग में उन्हें रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड से हमला करने की धमकी दी गई है, साथ ही बेहद आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल भी किया गया है।
बताया जा रहा है कि दोनों इन्फ्लुएंसर लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और गोरक्षा व हिंदुत्व से जुड़े विषयों पर मुखर रहते हैं। इसी कारण उन्हें लगातार टारगेट किया जा रहा है। हालांकि पहले इन दोनों पर कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई भी हो चुकी है।
एटीएस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को गंभीरता से लिया जा रहा है और सोशल मीडिया पर सक्रिय बड़े इन्फ्लुएंसरों की सुरक्षा और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। खासकर उन लोगों पर नजर रखी जा रही है जिनकी पोस्ट धार्मिक या वैचारिक रूप से संवेदनशील मानी जाती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल ऑनलाइन धमकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित आतंकी और स्लीपर सेल नेटवर्क की आशंका भी है, जिसकी गहन जांच जारी है।
