करीब 1400 किलोमीटर दूर Kolkata से वृंदावन पहुंचीं श्रद्धालु जूही भावनी ने कहा कि महाराज जी अभी दर्शन नहीं दे रहे हैं तो भी कोई बात नहीं, वे यहीं रुककर इंतजार करेंगी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें विश्वास है कि राधारानी की कृपा से प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ होंगे और फिर भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसी तरह राजस्थान, असम, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से भक्त वृंदावन पहुंच रहे हैं।
हाल ही में प्रेमानंद महाराज का एक भावुक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। चिंता मत करिए, खूब नाम जप करो।” इस संदेश के बाद भक्तों और शिष्यों में चिंता और भावुकता दोनों बढ़ गई। हालांकि आश्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब उनकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और वे केवल चुनिंदा शरणागत शिष्यों से ही मुलाकात कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं। वर्ष 2006 में उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का पता चला था। उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हैं और सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस किया जाता है। वृंदावन स्थित उनके फ्लैट में ही डायलिसिस की विशेष व्यवस्था बनाई गई है। कई बार उनकी डायलिसिस प्रक्रिया 4 से 5 घंटे तक चलती है।
Vrindavan स्थित केली कुंज आश्रम के सेवादारों ने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इनकार किया, लेकिन ऑफ कैमरा उन्होंने बताया कि महाराज जी फिलहाल एकांत भजन और साधना में लीन हैं। उन्होंने भक्तों से अपील की कि महाराज जी के पूरे संदेश को ध्यान से सुनें और उनके भाव को समझें।
राजस्थान के पाली से आए श्रद्धालु जालम सिंह ने कहा कि गुरुदेव शरीर से दूर हो सकते हैं, लेकिन उनके बताए मार्ग पर चलने से वे हर भक्त के हृदय में हमेशा मौजूद रहेंगे। वहीं असम से आए भक्त ओमप्रकाश ने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए सर्वस्व हैं और सभी भक्त उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
17 मई से प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा भी स्थगित है। हर रोज हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त पदयात्रा में शामिल होते थे, जबकि बड़े आयोजनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी। हालांकि कुछ दिन पहले वे अपने आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने भी पहुंचे थे, जिससे भक्तों को उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद मिली है।
प्रेमानंद महाराज का जीवन भी बेहद प्रेरणादायक माना जाता है। कानपुर के अखरी गांव में जन्मे अनिरुद्ध कुमार पांडे ने महज 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था। बाद में वे वृंदावन पहुंचे और राधा-कृष्ण भक्ति में लीन होकर राधावल्लभी परंपरा के प्रमुख संतों में शामिल हो गए। आज देशभर में करोड़ों लोग उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं।
