NCRTC के अनुसार नमो भारत ट्रेनें 25 केवी (किलोवोल्ट) 50 हर्ट्ज ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम से चलती हैं, जिसे ओवरहेड कैटेनरी सिस्टम (OCS) के जरिए सप्लाई दी जाती है। पूरा कॉरिडोर अलग-अलग बड़े सब-स्टेशनों और मल्टी-ग्रिड नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिससे किसी एक स्थान पर फॉल्ट आने पर दूसरा ग्रिड तुरंत पावर सपोर्ट संभाल लेता है और ट्रेन संचालन बाधित नहीं होता।
रीजनरेटिव ब्रेकिंग से खुद बनती है बिजली
इस ट्रेन की एक खास तकनीक रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम है, जिसमें ट्रेन ब्रेक लगाने के दौरान अपनी गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलकर वापस ग्रिड में भेजती है। इससे लगभग 30 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत होती है और सिस्टम को अतिरिक्त पावर सपोर्ट भी मिलता है, जो आपात स्थिति में मददगार साबित होता है।
SCADA सिस्टम से रियल टाइम निगरानी
पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की निगरानी के लिए SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम हर सब-स्टेशन और पावर फ्लो पर लगातार नजर रखता है और किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में तुरंत पावर को दूसरे स्रोत की ओर डायवर्ट कर देता है, जिससे सेवा बिना रुके जारी रहती है।
पूरी तरह बिजली गुल होने पर भी सुरक्षित संचालन
NCRTC के अनुसार, यदि किसी वजह से मुख्य बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है, तब भी ट्रेनों और स्टेशनों में लगी बैकअप बैटरियां जरूरी सिस्टम जैसे लाइट, एयर कंडीशनिंग, कंट्रोल सिस्टम और इमरजेंसी गेट को चालू रखती हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है और किसी भी तरह की आपात स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोका जा सकता है।
गुड़गांव घटना से तुलना नहीं संभव
हाल ही में गुड़गांव में बिजली बाधित होने से रैपिड मेट्रो सेवा प्रभावित हुई थी, लेकिन NCRTC का दावा है कि नमो भारत का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम पर आधारित है, इसलिए ऐसी स्थिति यहां बनने की संभावना बेहद कम है। इस तकनीकी मजबूती के चलते दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को भरोसेमंद और निर्बाध सेवा मिलने का दावा किया गया है।
