नई दिल्ली(New Delhi)।
प्रसिद्ध कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी महाराज, जो अपनी आध्यात्मिक कथाओं और कृष्ण भक्ति के लिए देश-विदेश में पहचाने जाते हैं, हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने कथा-शुल्क और बुकिंग प्रक्रिया को लेकर खुलकर बोले। उन्होंने बताया कि कथा कराने का उनका कोई फिक्स रेट नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
पुंडरीक महाराज ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति उनसे कथा करवाना चाहता है, तो सबसे पहले उसे उनकी कथाओं को समझना और सुनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया , पहले मेरी पांच कथाएं सुनिए, जहां मैं कथा कर रहा हूं वहां आकर बैठिए, फिर प्रस्ताव लेकर आइए। अगर उस समय मेरे पास समय होगा, तो मैं निश्चित रूप से कथा करूंगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कथा की फीस कोई तय नहीं होती। आयोजक की क्षमता और परिस्थिति के अनुसार ही दक्षिणा या सहयोग लिया जाता है। उनके अनुसार, जो जितनी सामर्थ्य रखता है, उतनी ही श्रद्धा से सहयोग करता है। मैं किसी पर दबाव नहीं डालता।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके पुंडरीक गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने शुरुआती शिक्षा वृंदावन और मथुरा से प्राप्त की, बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी और फिर ऑक्सफोर्ड तक पहुंचे, लेकिन अंततः उन्होंने कथावाचन को ही अपना जीवन बना लिया।
वे 38वीं पीढ़ी के कथावाचक हैं और उनका परिवार लंबे समय से भागवत कथा की परंपरा निभाता आ रहा है। उन्होंने बताया कि मात्र 7 वर्ष की उम्र में उन्होंने भगवद्गीता पर प्रवचन देकर सभी को प्रभावित कर दिया था।
आज पुंडरीक गोस्वामी महाराज गौड़ीय वैष्णव परंपरा को दुनिया भर में फैला रहे हैं और उनकी कथाएं श्रीमद्भागवत, राम कथा और भगवद्गीता पर आधारित होती हैं। उनके प्रवचनों में भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक संदेशों का गहरा समावेश देखने को मिलता है।
