मैच के 20वें ओवर में इंग्लैंड को जीत के लिए 30 रन की जरूरत थी। बेथेल ने पहली गेंद पर लॉन्ग-ऑफ की दिशा में शॉट मारा, जो पांड्या के पास स्कूप होकर आया। पांड्या ने गेंद स्ट्राइकर एंड की ओर थ्रो किया। बेथेल दूसरी रन के लिए दौड़े, लेकिन क्रीज तक नहीं पहुँच पाए और रन-आउट हो गए। इस विकेट के साथ ही इंग्लैंड की जीत की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।
बीसीसीआई टीवी के एक वीडियो में हार्दिक पांड्या ने उस पल को याद किया। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें दो रास्ते नजर आ रहे थे। उनका दिल तेजी से धड़क रहा था, लेकिन उन्होंने खुद को ‘जेन मोड’ में रखा। पांड्या ने बताया, “बेथेल ऐसे बल्लेबाज थे जिन्हें मुझे आउट करना था। मुझे पता था कि अगर मैं शांत रहकर सही दिशा में थ्रो करूंगा तो काम पूरा होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने थोड़ा और स्टंप के करीब फेंकने का इरादा रखा था, लेकिन टीम की योजना सफल रही और विकेट हासिल हो गया। इस रन-आउट के बाद टीम ने जोरदार जश्न मनाया। पांड्या ने मजाक में बताया कि उनके उत्साह का एक कारण यह भी था कि उनका बेटा और बेटी माहिका भी वहां मौजूद थे और उन्होंने चाहा कि उनका परिवार इस पल का आनंद उठाए।
हार्दिक पांड्या ने उस मैच में 19वां ओवर भी फेंका, जिसमें उन्होंने सिर्फ 9 रन दिए और टीम की जीत सुनिश्चित की। उनके शांत और निर्णायक अंदाज ने भारत को फाइनल में पहुँचने में मदद की और इंग्लैंड की जीत की राह को रोक दिया।
इससे यह साफ हो गया कि हार्दिक पांड्या न सिर्फ एक आक्रामक खिलाड़ी हैं बल्कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी शांत रहकर टीम के लिए निर्णायक योगदान दे सकते हैं। उनकी यह रणनीति और जेन मोड में रहने की क्षमता ही भारतीय टीम को फाइनल की राह पर ले गई।
