आर्य बब्बर का जन्म मुंबई के एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार में हुआ। उनके पिता राज बब्बर हिंदी सिनेमा के चर्चित और सफल अभिनेता रहे हैं, जबकि उनकी मां नादिरा बब्बर थिएटर जगत का बड़ा नाम मानी जाती हैं। घर में अभिनय और कला का माहौल होने की वजह से आर्य का झुकाव भी बचपन से फिल्मों की तरफ हो गया था। उन्होंने हमेशा अपने पिता की तरह लंबा और मजबूत करियर बनाने का सपना देखा, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा।
आर्य बब्बर ने अपने करियर की शुरुआत साल 2002 में फिल्म ‘अब के बरस’ से की थी। इस फिल्म से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं और दर्शकों को भी लगा था कि वह बॉलीवुड में लंबी पारी खेलेंगे। फिल्म में उनके साथ अमृता राव नजर आई थीं, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी। पहली फिल्म के असफल होने का असर उनके करियर पर भी पड़ा। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार फिल्मों में काम करते रहे।
आर्य बब्बर कई फिल्मों में नजर आए जिनमें ‘गुरु’, ‘रेडी’ और ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की, लेकिन फिर भी उन्हें इंडस्ट्री में वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। धीरे-धीरे बॉलीवुड में उनका करियर कमजोर पड़ने लगा और उन्हें मुख्य अभिनेता के बजाय सहायक भूमिकाओं तक सीमित होना पड़ा।
बॉलीवुड में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने के बाद आर्य ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया। यहां उनके अभिनय को सराहना मिली और दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया। उनकी फिल्म ‘यार अन्मुल्ले’ ने उन्हें पंजाबी सिनेमा में एक नई पहचान दिलाई। इससे यह साबित हुआ कि उनमें अभिनय की क्षमता थी, लेकिन शायद हिंदी फिल्मों में उन्हें सही मौके नहीं मिल पाए।
फिल्मों के अलावा आर्य बब्बर ने टीवी की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस 8’ का हिस्सा बने, जहां उनके अलग अंदाज और बेबाक बयान काफी चर्चा में रहे। हालांकि शो में उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला, लेकिन उन्होंने दर्शकों का ध्यान जरूर खींचा। इसके अलावा उन्होंने पौराणिक टीवी शो में रावण का किरदार निभाकर भी लोगों की सराहना हासिल की।
आर्य बब्बर केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहे। उन्हें लेखन का भी शौक है और उन्होंने कॉमिक बुक भी लिखी। यह दिखाता है कि वह खुद को लगातार नए क्षेत्रों में आजमाने की कोशिश करते रहे। भले ही उन्हें बॉलीवुड में पिता जैसी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने हुनर के दम पर अलग-अलग मंचों पर खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।
