अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के पहले कार्यकाल के दौरान चुनावी सलाहकार रहे रिपब्लिकन नेता Puneet Ahluwalia ने कहा कि अदाणी समूह का यह निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों की बढ़ती ताकत और भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के पेशेवर और कारोबारी आज अमेरिका में रोजगार और अवसर पैदा कर रहे हैं, ऐसे में अदाणी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनी का निवेश दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
अहलूवालिया ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और ऐसे समय में भारत की बड़ी कंपनियों का अमेरिका में निवेश रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ पहले हुई कुछ कार्रवाइयों में राजनीतिक कारण हो सकते हैं और अगर ऐसा साबित होता है तो उन्हें इसमें कोई हैरानी नहीं होगी।
वहीं, BJP USA के अध्यक्ष Adapa Prasad ने कहा कि अमेरिकी अभियोजकों द्वारा मामला वापस लेना यह दिखाता है कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं थे। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक प्रगति को कमजोर करने की कोशिश बताते हुए कहा कि आखिरकार सच्चाई की जीत हुई।
उधर, Foundation for India and Indian Diaspora Studies के संस्थापक निदेशक Khanderao Kand ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संयुक्त रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट और नीति निर्माण में गहरे सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बाजार तक आसान पहुंच जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों को दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप का यह प्रस्तावित निवेश न केवल अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक विश्वसनीयता और निवेश क्षमता की छवि भी मजबूत होगी।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से भी यह निवेश अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में अदाणी समूह का अमेरिकी निवेश आने वाले समय में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।
