नई नीति में साफ किया गया है कि अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य वन सेवा, पुलिस सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी। जिला संवर्ग कर्मचारियों और तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।
तबादले के लिए तय किए गए प्रमुख नियम
एक स्थान पर 3 वर्ष से अधिक पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को प्राथमिकता से बदला जा सकेगा।
सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय बचने पर सामान्यतः तबादला नहीं होगा।
40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य तबादला नहीं किया जाएगा।
पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कैंसर, किडनी, हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारी की स्थिति में मेडिकल आधार पर तबादला संभव होगा।
प्रतिबंध अवधि में किन परिस्थितियों में होगा ट्रांसफर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि में केवल विशेष परिस्थितियों में ही तबादले किए जाएंगे। इनमें गंभीर बीमारी, न्यायालय के आदेश, गंभीर अनुशासनात्मक शिकायत, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जांच, पदोन्नति, सेवानिवृत्ति या रिक्त पद भरने जैसी स्थितियां शामिल हैं।
सभी तबादला आदेश ई-ऑफिस के माध्यम से ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून 2026 के बाद जारी किए गए सामान्य तबादला आदेश स्वतः शून्य माने जाएंगे।
अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि पहले अनुसूचित क्षेत्रों के रिक्त पद भरे जाएंगे। वहां 3 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाएगा।
गृह जिले में पोस्टिंग पर रोक
कायपालिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सामान्यतः उनके गृह जिले में पदस्थ नहीं किया जाएगा। हालांकि अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को राहत दी गई है।
महिला अधिकारियों को प्राथमिकता
कम लिंगानुपात वाले जिलों में महिला अधिकारियों की पदस्थापना को प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इनमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, छतरपुर, सागर, विदिशा और रायसेन शामिल हैं।
